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नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

पृष्ठ 30, कुल 194 में से

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८ श्रीभर्तृहरिविरचितम्

४. मरुस्थल में प्रकाश की किरणों के कारण जल की प्रतीति होना, मृगतृष्णा या मृगमरीचिका कहलाता है। ५. शशविषाण पूर्णतया असम्भव वस्तु या कार्य के लिए लोक व्यवहार में प्रयुक्त होता है।

व्याकरणात्मक टिप्पणी-

१. पिपासार्दितः =पिपासा + अर्दितः (आ + अ = आ, अकः सवर्णे दीर्घः) पिपासया अर्दितः (तृतीया तत्पुरुष समास) पिपासा = √पा + सन् + अ + टाप्। अर्दितः = √अर्द + क्त। २. कदाचित् + अपि (व्यञ्जन संधि, झलां जशोऽन्ते) ३. पर्यटञ्छशविषाण....... = पर्यटन् + शशविषाण.......... (व्यञ्जन संधि-शशछोऽटि) ४. पीडयन् = √पीड् + शतृ (पुल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन) ५. मृगतृष्णिकासु = मृगाणां तृष्णा यत्र सा मृगतृष्णा तासु ६. पर्यटन् = परि + √अट् + शतृ (पुल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन) ७. शशविषाणम् = शशस्य विषाणम् (षष्ठी तत्पुरुष) ८. आसादयेत् = आ + √सद् + णिच् (विधिलिंग, प्रथम पुरुष, एकवचन)

व्यालं बालमृणालतन्तुभिरसौ रोद्धुं समुज्जृम्भते,
छेत्तुं वज्रमणीञ्छिीरीषकुसुमप्रान्तेन संनह्यति।
माधुर्यं मधुविन्दुना रचयितुं क्षाराम्बुधेरीहते,
नेतुं वाञ्छति यः खलान् पथि सतां सूक्तैः सुधास्यंदिभिः॥७॥

अन्वय- असौ बालमृणालतन्तुभिः व्यालम् रोद्धुम् समुज्जृम्भते, शिरीषकुसुमप्रान्तेन वज्रमणीम् छेतुम् सत्रह्यते, मधुबिन्दुना क्षाराम्बुधेः माधुर्यम् रचयितुम् ईहते, यः सुधास्यन्दिभिः सूक्तैः खलान् सताम् पथि नेतुम् वाञ्छति।

अनुवाद- वह (व्यक्ति) कोमल कमलनाल के धागों से (मदमस्त) हाथी को रोकने के लिए उद्यत होता है, (कोमल) शिरीष के फूल (की पंखुडी) के किनारे से अत्यन्त कठोर मणि (हीरे) को काटने के लिए चेष्टा करता है, शहद की एक बूँद से खारे समुद्र को मीठा बनाना चाहता है, जो अमृतवर्षी सूक्तियों के द्वारा दुष्टों को सज्जनों के मार्ग पर ले जाना चाहता है।

व्याख्या- किसी दुष्ट स्वभाव के व्यक्ति को अच्छी-अच्छी बातों का उपदेश देकर यदि कोई व्यक्ति सज्जन बनाना चाहता है तो वह मानो ठीक उसी प्रकार पूर्णतया असम्भव एवं मूर्खतापूर्ण कार्य कर रहा है जैसे- कमल की नाल में स्थित धागों (रेशों)

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