नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)
Niti Shataka of Bhartrihari Hindi
महाराज भर्तृहरि द्वारा
स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२४ श्रीभर्तृहरिविरचितम्
६. प्रस्तुत श्लोक में मालिनी छन्द प्रयुक्त हुआ है, लक्षण— ननमयययुतेयं मालिनी भोगिलोकैः॥
व्याकरणात्मक टिप्पणी— १. अधिगतः परमार्थः यैः अधिगतपरमार्थः तान् = अधिगतपरमार्थान्। अधि + √गम् + क्त = अधिगत २. अव + √मन् + थास् (लुङ् लकार, म.पु., एकवचन) ३. सम् + √रुध् + तिप् (लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन) ४. बिसानाम् तन्तुः = बिसतन्तुः (षष्ठी तत्पुरुष) ५. √वृ + णिच् + ल्युट् (नपु., प्रथमा विभक्ति, एकवचन) ६. अभिनवाभिः मदलेखाभिः श्यामानि गण्डस्थलानि येषाम्, तेषाम् = अभिनवमदलेखाश्यामगण्डस्थलानाम्। ७. न + एव = नैव (वृद्धिः -वृद्धिरेचि) ८. बिसतन्तुर्वारणम् = बिसतन्तुः + वारणम् (विसर्ग संधि)
अम्भोजिनीवनविहार विलासमेव,
हंसस्य हन्ति नितरां कुपितो विधाता।
न त्वस्य दुग्धजलभेदविधौ प्रसिद्धां,
वैदग्ध्यकीर्तिमपहर्तुमसौ समर्थः॥१९॥
अन्वय- नितराम् कुपितः विधाता हंसस्य अम्भोजिनी वन-विहार-विलासम् एव हन्ति, तु असौ अस्य दुग्ध-जलभेदविधौ प्रसिद्धां वैदग्ध्यकीर्तिम् अपहर्तुम् समर्थः न (अस्ति)।
अनुवाद- अत्यधिक क्रोधित हुआ विधाता हंस के कमल वन में विहरण के आनन्द को ही नष्ट कर सकता है, किन्तु वह इसके दूध और जल को अलग-अलग करने सम्बन्धी प्रसिद्ध निपुणता विषयक यश को छीनने में समर्थ नहीं (है)।
व्याख्या- ब्रह्मा यदि किसी कारणवश अपने वाहन हंस पर अत्यधिक नाराज़ हो जाए तो अधिक से अधिक वह इसे कमल-वन में जाने से रोककर इसके सुख अथवा आनन्द को कम कर सकता है, किन्तु वह किसी भी स्थिति में हंस के पास जो दूध और पानी को अलग-अलग करने की सामर्थ्य अथवा योग्यता है, उसे उससे नहीं छीन सकता है।
कहने का तात्पर्य है कि यदि कोई धनवान् स्वामी अथवा राजा अपने आश्रित सेवक के प्रति किसी कारणवश नाराज हो जाए तो अधिक से अधिक वह उसे अपनी नौकरी से हटा सकता है अथवा उसकी सम्पत्ति छीन कर उसे देश निकाला दे सकता है, किन्तु