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नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 194 में से

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नीतिशतकम् ४९

अन्वय- सिंहः शिशुः अपि मदमलिन कपोलभित्तिषु गजेषु निपतति, खलु इयम् सत्त्ववताम् प्रकृतिः, वयः खलु तेजसः हेतुः न (भवति)।

अनुवाद- शेर का बच्चा भी मद से मलिन गण्डस्थलों वाले हाथियों पर आक्रमण करता है, निश्चय ही यह तेजस्वियों का स्वभाव (है), आयु ही तेज का कारण नहीं (होती)।

व्याख्या- पराक्रम तेजस्वी प्राणी का स्वभाव ही होता है, चाहे वह किसी भी आयु का क्यों न हो। अतः पराक्रम प्रदर्शन का सम्बन्ध आयु से नहीं, अपितु व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर है।

यही कारण है कि शेर का बच्चा अल्पायु होने पर भी छोटे-मोटे प्राणियों को अपना शिकार नहीं बनाता है, अपितु ऐसे शक्तिशाली हाथी, जिनके गण्डस्थल मदजल के निरन्तर बहने के कारण मलिन हैं, पर ही शिकार करने के लिए आक्रमण करता है।

विशेष- १. पराक्रम का सम्बन्ध आयु से नहीं, अपितु व्यक्ति या प्राणी के स्वभाव से है। २. प्रस्तुत श्लोक में आर्या छन्द का प्रयोग हुआ है, लक्षण पूर्ववत् है। ३. मद-शक्तिशाली एवं नवयुवक श्रेष्ठश्रेणी के हाथी की कनपटियों से निकलने वाला द्रव पदार्थ। ४. काव्यलिंग अलंकार।

व्याकरणात्मक टिप्पणी- १. प्रकृतिः + इयम् (ससंजुषो रुः विसर्ग) प्रकृतिरियम् २. शिशुः + अपि (ससजुषो रुः, विसर्ग) शिशुरपि ३. नि + √पत् + तिप् (लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन) निपतति ४. सत्त्व + मतुप् = सत्त्वत् (षष्ठी विभक्ति, बहुवचन) ५. मदेन मलिनाः कपोलानाम् भित्तयः येषाम् तेषु ६. तेजसः + हेतुः (विसर्ग, हशि च)

मालतीकुसुमस्येव द्वे गती स्तो मनस्विनः।
मूर्ध्नि वा सर्वलोकस्य शीर्यते वन एव वा॥३७॥

अन्वय- मालती कुसुमस्य इव मनस्विनः द्वे गती स्तः। सर्वलोकस्य मूर्ध्नि वने एव वा शीर्यते।

अनुवाद- मालती पुष्प के समान मनस्वी की दो स्थितियाँ हैं। (वह या तो) सभी लोगों के ऊपर (रहता है) या (फिर) वन में ही नष्ट हो जाता है।

व्याख्या- जो लोग स्वाभिमानी होते हैं, उनकी स्थिति मालती के फूल के समान दो प्रकार की होती है— जिस प्रकार पुष्प, देवता आदि के मस्तक पर आरूढ होकर सम्मान