भारतकोश
नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

पृष्ठ 77, कुल 194 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 77

नीतिशतकम् ५५

४. गुण + ज्ञा + क (पुंल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन) = गुणज्ञः ५. √वच् + तृच् (पुंल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन) = वक्ता ६. √दृश् + अनीयर् ((पुंल्लिंग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन) = दर्शनीयः ७. आ + √श्रि + णिच् (आत्मने, लट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन) ८. √विद् + क्त = वित्तम् ९. श्रुतम् अस्य अस्ति इति, श्रुतवान् १०. यस्य + अस्ति = (दीर्घ, अकः सवर्णे दीर्घः) = यस्यास्ति ११. यहाँ सर्वत्र सः के विसर्गों का लोप "एतत्तदोः सुलोपोऽकोर नञ् समासे हलि" इत्यादि सूत्र से हुआ है। १२. स एव में विसर्ग का लोप "सोऽचि लोपे चेत्पादपूरणम्" सूत्र से हुआ है।

दौर्मन्त्र्यान्नृपति र्विनश्यति यतिः सङ्गात्सुतो लालनात्,
विप्रोऽनध्ययनात्कुलं कुतनयाच्छीलं खलोपासनात्।
ह्रीर्मद्यादनवेक्षणादपि कृषिः स्नेहः प्रवासाश्रयान्,
मैत्री चाप्रणयात्समृद्धिरनयात् त्यागात्प्रमादाद् धनम्॥४२॥

अन्वय- दौर्मन्त्र्यात् नृपतिः, सङ्गात् यतिः, लालनात् सुतः, अनध्ययनात् विप्रः, कुतनयात् कुलम्, खलोपासनात् शीलम्, मद्यात् ह्रीः, अनवेक्षणात् कृषिः, अपि प्रवासाश्रयात् स्नेहः, अप्रणयात् मैत्री, अनयात् समृद्धिः, त्यागात् च धनम् विनश्यति।

अनुवाद- अनुचित सलाह से राजा, (विषयों के) सङ्ग से सन्यासी, लाड़-प्यार से पुत्र, अनध्ययन से ब्राह्मण, कुपुत्र से वंश, दुष्टों की संगति से सदाचार, मदिरा से लज्जा, देखभाल न करने से खेती भी, विदेश में रहने से प्रेम, प्रेम के अभाव में मित्रता, अनीति से समृद्धि, त्याग और आलस्य से धन नष्ट हो जाता है।

व्याख्या- यदि राजा को गलत सलाह देने वाले मन्त्री मिल जाएँ तो वह नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार यदि सन्यासी इन्द्रियों के विषयों में आसक्त हो जाए अर्थात् सांसारिक भोगों में लिप्त हो जाए तो वह नष्ट हो जाता है। यदि पुत्र को बहुत अधिक लाड़-प्यार दिया जाए तो वह बिगड़ जाता है अर्थात् गलत मार्ग पर चल कर नष्ट हो जाता है।

यदि ब्राह्मण प्रतिदिन शास्त्रों का अध्ययन न करे तो उसका प्रभाव ज्ञान के अभाव में कम होने के कारण, वह नष्ट हो जाता है। यदि वंश में बुरी आदतों वाला, दुष्टों की संगति में रहने वाला पुत्र रहे तो वह कुल ही नष्ट हो जाता है। इसी प्रकार यदि व्यक्ति दुष्टों की संगति में रहता है तो उसका सदाचरण नष्ट हो जाता है अर्थात् वह दुराचरण करने लगेगा।

यदि व्यक्ति शराब पी ले तो उसकी लज्जा नष्ट हो जाती है, वह किसी भी गलत