भारतकोश
नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

नीतिवाक्यामृतम् (आचार्य सोमदेव सूरि - पण्डित रामचन्द्र मालवीय सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Nitivakyamritam of Somadeva Suri with Commentary

आचार्य सोमदेव सूरि (टीकाकार: पं. रामचन्द्र मालवीय) द्वारा

DevanagariHindipublished220 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 220 में से

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१५० नीतिवाक्यामृतम् अपने द्वारा किये गये वमन के समान अपने द्वारा दी गई वस्तु का पुनः अभिलाष नहीं करना चाहिए । उपकृत्य मूकभावोऽभिजातानाम् ॥ २४ ॥ कुलीन व्यक्ति उपकार करने के अनन्तर मौन रहते हैं । परदोषश्रवणे बधिरभावः सत्पुरुषाणाम् ॥ २५ ॥ सज्जन पुरुष दूसरे का दोष सुनने के समय बहरे बन जाते हैं । परकलत्रदर्शनेऽन्धभावो महाभाग्यानाम् ॥ २६ ॥ अतीव पुण्यशाली व्यक्ति दूसरे की स्त्री को देखने के अवसर पर अन्धे बन जाते हैं । शत्रावपि गृहायाते संभ्रमः कर्त्तव्यः किं पुनर्न महति ॥ २७ ॥ जबकि अपने घर में शत्रु के भी आने पर उसका समादर करना उचित है तो महान् व्यक्ति के आगमन पर उसका समादर क्यों न किया जायगा । अन्तः सारधनमिव स्वधर्मो न प्रकाशनीयः ॥ २८ ॥ गुप्त धन को जिस प्रकार दूसरे को नहीं बताया जाता उसी प्रकार अपना धर्माचरण भी किसी के समक्ष नहीं व्यक्त करना चाहिए । मदप्रमादजे दोषे गुरुषु निवेदनम् अनु प्रायश्चित्तं च प्रतीकारः ॥ २६ ॥ काम क्रोध आदि के मद-वश अथवा असावधानी से किये गये दुष्कृत्य को गुरुजनों से निवेदन करने के अनन्तर उसका प्रायश्चित्त कर लेना ही उसका प्रतीकार है । श्रीमतोऽर्थार्जने कायक्लेशो धन्यो, यो देव-द्विजान् प्रीणाति ॥३०॥ जिस धन से देवता और ब्राह्मणों को प्रसन्न किया जाता हो उस धन के अर्जन में श्रीमानों का कष्ट धन्यवाद के योग्य है । चणका इव नीचा उदरस्थापिता अपि नाविवुर्वाणास्तिष्ठन्ति ॥३१॥ नीचों के साथ कितना भी आत्मीय भाव क्यों न कर लिया जाय वे पेट में डाले गये अर्थात् खाये हुये चनों की भांति कुछ न कुछ विकार करते ही हैं । स पुमान् वन्द्यचरितो यः प्रत्युपकारमनवेक्ष्य परोपकारं करोति ॥ ३२ ॥ उस पुरुष का आचरण वन्दनीय है जो प्रत्युपकार की आशा न रखकर दूसरे का उपकार करता है । अज्ञानस्य वैराग्यं, भिक्षोर्विटत्वम्, अधनस्य विलासो, वेश्यारतस्य शौचम्, अविदितवेदितव्यस्य तत्त्वग्रह इति पञ्च न कस्य मस्तक- शूलानि ॥ ३३ ॥ अज्ञानी का वैराग्य ग्रहण करना, भिक्षु का कामुक होना, निर्धन का