न्याय दर्शन (वात्स्यायन भाष्य सहित)
Nyaya Darshan with Vatsyayana Bhashya
महर्षि गौतम / महर्षि वात्स्यायन द्वारा
स्रोत: बौद्ध भारती वाराणसी · बौद्ध भारती वाराणसी · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 172, कुल 410 में से
संदर्भ में पढ़ें१५४ वात्स्यायनभाष्यसहिते न्यायदर्शने [ २. अ० २. आ० सिद्धयतीति । तत्र यदुक्तम्-‘अन्यताया अभाव:’ इति, एतदयुक्तमिति ॥ ३२ ॥ अस्तु तर्हीदानीं शब्दस्य नित्यत्वम् ? विनाशकारणानुपलब्धेः ? ॥ ३३ ॥ यदनित्यं तस्य विनाशः कारणाद्भवति, यथा—लोष्टस्य कारणद्रव्यविभा- गात् । शब्दश्चेदनित्यः, तस्य विनाशो यस्मात् कारणाद्भवति तदुपलभ्येत, न चोपलभ्यते, तस्मान्नित्य इति ? ॥ ३३ ॥ अश्रवणकारणानुपलब्धेः सततश्रवणप्रसङ्गः ॥ ३४ ॥ यथा विनाशकारणानुपलब्धेरविनाशप्रसङ्गः, एवमश्रवणकारणानुपलब्धेः सततं श्रवणप्रसङ्गः । व्यञ्जकाभावादश्रवणमिति चेत् ? प्रतिषिद्धं व्यञ्जकम् । अथ विद्यमानस्य निर्निमित्तमश्रवणमिति विद्यमानस्य निर्निमित्तो विनाश इति । समानश्च दृष्टविरोधो निमित्तमन्तरेण विनाशे च, अश्रवणे चेति ॥ ३४ ॥ उपलभ्यमाने चानुपलब्धेरसत्त्वादनपदेशः ॥ ३५ ॥ अनुमानाच्चोपलभ्यमाने शब्दस्य विनाशकारणे विनाशकारणानुपलब्धेर- सत्त्वादित्यनपदेशः, यथा—यस्माद्विषाणी तस्मादश्व इति । किमनुमानमिति चेत् ? इस नञ् के साथ किसका समास होगा ? अतः उन दोनों 'अन्य' तथा 'अनन्य' शब्दों में से एक 'अनन्य' शब्द दूसरे 'अन्य' शब्द की अपेक्षा रखता हुआ सिद्ध हो जाता है। तब आपने जो 'अनन्यता' का अभाव बताया, वह अयुक्त है ॥ ३२ ॥ शङ्का—तो क्या अब शब्द का नित्यत्व मान लें— विनाशकारण की उपलब्धि न होने से ? ॥ ३३ ॥ जो अनित्य है, कारण से उसका विनाश होता है। जैसे—ढेले का विनाश उसके कारणद्रव्य के विभाग से । शब्द यदि अनित्य होता तो उसका विनाश जिस कारण से होता हो वह मिलता ! मिलता है नहीं, अतः शब्द नित्य है ? ॥ ३३ ॥ तब अश्रवणकारण की अनुपलब्धि से श्रवणनैरन्तर्य प्रसक्त होने लगेगा ! ॥ ३४ ॥ जैसे विनाशकारण की उपलब्धि न होने से शब्द का नित्यत्व मान रहे हो तब तो उसके अश्रवण कारण की उपलब्धि न होने से निरन्तर श्रवणप्रसक्ति होने लगेगी ! यदि 'व्यञ्जक न होने से श्रवण नहीं होता'—ऐसा कहोगे ? तो हम व्यञ्जक का पीछे निषेध कर आये । यदि विद्यमान का अकारण अश्रवण मानोगे ? तो विद्यमान का अकारण विनाश होने लगेगा । निमित्त के बिना विनाश तथा अश्रवण में दृष्टविरोध की समा- नता ही है ॥ ३४ ॥ उपलभ्यमान होने पर अनुपलब्धि न होने से वह अहेतु है ॥ ३५ ॥ शब्द का विनाशकारण अनुमान से उपलभ्यमान होने से उसकी अनुपलब्धि से नित्यत्व नहीं माना जा सकता । जैसे—'जिस कारण से विषाणी है उसी कारण से अश्व हैं'। अनुमान क्या है ? सन्तान (शब्दधारा) का उपपादन । शब्दसन्तान उपपादित है, जैसे