भारतकोश
एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)

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चन्द्रकान्त मणिको मटकीके मुख पर रख दिया, उस समय चन्द्रकान्त मणिके प्रभाव स्वरूप उस कुम्भ स्थित जल इस तरह का हो जायेगा कि प्यास तो मिटेगी ही, विशेषता यह होगी रोगयुक्त को, व्याधि वालेको, प्यासे जीव को शीतलता प्राप्त हो जावेगी इस प्रकारका चमत्कार, जल सब लोग पी रहे मात्र एक बार मटकीका प्रभाव घटानेके लिये उसने मटकीको एक चक्रवर्ती राजाके अखाड़ेके भीतर ले जाकर ले जा कर फेंक दिया ऐसा मान करके उस अखाड़ेके उस चबूतरे स्वरूप जगह जहां पहलवान लोग हाथ धोते व्यायाम करनेके उपरान्त मिट्टी हाथ पैर पर लगा करके व्यायाम करनेके पश्चात् हाथ पांव धो कर धोके अपना पसीना, व्यायाम की थकाव-थकावट, उस चन्द्रकान्तके इस जल द्वारा मिटा करके सब लोग अपने अपने शरीरको पुष्ट बना रहे तथा उसी कुम्भका जल सब लोग पीकरके अपने परिश्रम द्वारा जो भी प्यास तृषातुरता लगी उस प्यासका शमन करके प्रसन्न हो, राजा को इसके बदले में धन भेट कर रहे थे ऐसा राजा भी देख रहा, उस समय में एक बार राजाने भी विचार! प्यास तो सब मनुष्य भोगते ही उसे उस प्रकार तृषाका अनुभव उस दिन भी हुआ उस समय अखाड़ेके मल्लके द्वारा हाथ धोके जल पिया था। उसने विचारवान् मल्लसे कहा कि भाई, सुनो, इस चन्द्रकान्तके जल-रस का पान तुमने किया सुनो, इस मटके जल रस-रस का पान तुमने किया, इस जलमें अन्य रस ही था! स्वभाविक इस जल द्वारा जहां रस का पान किया इस चन्द्रकान्तके, मटके--मटकीके द्वारा भी? पहलवान कह उठा राजन् सुनो, यह जलके चन्द्रकान्त प्रभावके, मटकीके प्रभावके कारण ही सब लोगों तृप्ति कर रहा यह तो मटकी रस का प्रभाव था उस जल में, इस प्रकार विचार तो करना केवल तृषाका मिट जाना, जल प्यासवाले को जलके रस द्वारा उस जल द्वारा जिस प्रकार शीतलता प्राप्त हुई उस जलको पान करके तृप्त होनेके पश्चात् उस जलका प्रभाव मिट जानेके पश्चात् उस जल प्रभावके पश्चात् राजा मल्ल विचार! जलके घट रसका पान करके तृषा शान्त करनेके बाद विचार करता हुआ उस जल रसको अन्य जीवोंके अखाड़ा रूप जल द्वारा पान करके तृषाके मिटनेके पश्चात् उसने तो तृषा मिटनेके पश्चात् अन्य अन्य अन्य प्रकारकी प्यासके मिट जानेपर तृषाके अन्य रूपको जल तो तृषा मिटाने मात्र रूप ही समझा जाता था विचारके रूप द्वारा, केवल उस मटकी मात्र का जल पान करने पर पहलवान, उस चन्द्रकान्त मटकेके प्रभाव को जान कर, तृषाके शमनके द्वारा राजा कह उठा उसका उस समय चन्द्रके इस जलके द्वारा जहां रस का पान विचारके द्वारा रस का रस रूप ही विचार मात्र बन गया प्यास इस प्रकार राजा उस चन्द्रकान्त को, यह जल जो कि म मटके द्वारा तृषाके मिटानेके पश्चात उस जल-रस रूप का पान करके, उस जलके म रसका पान करने पश्चात् जल तृषाके मिटाने का विचार तो पश्चात् बना रहा, जिस प्रकार तृषा मिटने पश्चात् म रसका पान हुआ? यह उस जलके रस का था? या अन्य प्रभाव... ॥ विचार करनेके पश्चात् राजा चन्द्रकान्तके घट जल पान रूप रस के पश्चात् तृषा मिटाने पश्चात् विचारवान् जल प्रभाव पान को राजा विचारके रूप द्वारा जो उस जल का प्रभाव देखा था पहलवानके, जल पान करने पश्चात् वह तृषा मिटने, उस रस द्वारा मिटने रूप उस जल प्रभाव म मटके का रूप प्रभाव मटके द्वारा घट जल रस का प्रभाव को उस रूप में समझा जाता था तृषाके शमन हो जाने पश्चात्, उसने तो उस समय इसके रूप स्वरूप घट रस का पान किया! मल्ल द्वारा ऐसा पान करने का जो विचार बनाया उस मटकेके प्रभाव रूप तृषाके मिटने, पश्चात् जल पान का भाव, घट रस रूप मटकेके प्रभाव मिटाने मात्रके पश्चात् उस म मटके रस द्वारा विचारने पश्चात् जो तृषा मटकीके रस के प्रभाव म बनाया, वह रस रूप घट जल पान का विचार रस उस समय का पान, उस मटकेके जल चन्द्रकान्त द्वारा हुआ, जलके प्रभावकी तृषा मिटाने का जो चन्द्रकान्त से सम्पर्क द्वारा मटके का रस बनके राजाने पान कर लिया रूपका, जो कि तृषाके शमन करने रूप, चन्द्रकान्त मटकेके जलके रूप द्वारा हुआ! जो जल का प्रभाव था उस चन्द्रकान्तके प्रभाव स्वरूप घट रस मात्र रूप में पान बनके प्यास मिटा गया, जलके उस चन्द्रकान्त के जल द्वारा राजाने तृषा मिटने पश्चात् ऐसा अनुभव प्राप्त किया, क्या मटका प्रभावसे जल बना? जल प्रभाव था उस रसका, जिसको चन्द्रकान्त द्वारा बनाया गया जल मटकेके प्रभाव द्वारा माना गया राजा विचार उठा, "प्यास तो मिटाना था, प्यास तो मिटाना जल द्वारा! चन्द्रकान्तका तो केवल बहाना" यह विचार कर राजाने घट रस रूप जलके चन्द्रकान्त के रस रूप घट जल द्वारा घट प्रभाव द्वारा जो चन्द्रकान्त का जल पान करने का रस रूप जो जल प्रभाव द्वारा मिट गया उस प्रभाव मात्र तृषाके विचार के रस रूप घट रसका पान विचार बना था? तो रस द्वारा घट का रसके प्रभाव स्वरूप घट का प्रभाव जल रूप बना हुआ देखा था, जिस रसके प्रभाव का विचार घट के रस द्वारा देखा गया था उस घट द्वारा 211