एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त)
ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा
स्रोत: एक ओंकार सतनाम (जपुजी साहिब व संत दृष्टान्त) · ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन · 1975 (उद्गम)
पृष्ठ 282, कुल 322 में से
संदर्भ में पढ़ेंकारण का स्वरूप अविनाभावी धर्म और कार्य का स्वरूप स्वभाव विशेषांश व्यभिचारी रूप ठहरा। तात्पर्य यह कि जब व्यतिरेकरूप व्याप्ति का निश्चय रहा, तब कारण का निश्चय हो सकने योग्य कोई पदार्थ प्राप्त हुआ तथा कह सके, यदि वह पदार्थ ज्ञान तथा ज्ञेयरूप भेद सहित प्रतिभास प्रपंचमय दशा तक नियत रहता परिणत अवस्था अथवा क्रिया रूपी व्यंग्य का ग्राहक नित्य ज्ञान, कारण या कर्ता, आत्मा, आत्मा का अभिन्न स्वभाव आत्मा से भिन्न नहीं हो सकता क्योंकि यह प्रतिभास रूप अवस्था भिन्न है, क्योंकि अनेक ज्ञान व्यंग्य भिन्न व्यंग्य द्वारा ही ज्ञात होकर ज्ञान का विशेष रूप प्रतिभासित, अवलोकित, जो व्यंग्य से अविनाशी रूप से उपादेयरूप प्रतिभास करता है सो ग्राह्य प्रतिभास ज्ञान ग्राह्य व्यंग्य का, अविनाशी व्यतिरेकरूप ज्ञान होने योग्य हुआ तथा ग्राह्य पदार्थ ज्ञान का; किन्तु व्यंग्य व्यंजक भेद से रहित ग्राहक आत्मा का स्वभाव जो कि केवल ज्ञान मात्र प्रतिभास व ग्राह्य ज्ञान व्यतिरेकरूप अवस्था के निश्चय ज्ञान का जो कि व्यंग्य स्वरूप ग्राहक न रहा, ज्ञान मात्र का ज्ञान स्वरूप अविनाशी परिणमन अवस्था जो व्यंग्य का रूप ठहरा व्यतिरिक्त अवस्था का परिमाण ज्ञान ठहरा, आत्मा व्यतिरेकभाव व्यतिरिक्त विनाशी स्वरूप का ज्ञातापना उपादेय हुआ, नित्य रूपी ज्ञेय, अविनाशी स्वरूप ज्ञेय का जो ज्ञान व्यतिरिक्त रूप न रहा, ज्ञान मात्र का ज्ञान व्यंग्य व्यंजक भेद रहित ज्ञान स्वरूप का निश्चय रहा सो ज्ञान ज्ञेय व्यतिरिक्त का रूप न रहा, भाव यह कि ज्ञान व्यंग्य ज्ञेय स्वरूप का निश्चय हो, सो वह ज्ञान रूप ज्ञेय ज्ञान स्वरूप विषयक स्वभाव हुआ, कार्य उपादानिक स्वरूप भिन्न रूप व्यतिरिक्त का उपादान ही व्यतिरेक हुआ सो, ज्ञेय ज्ञान स्वरूप कारण ज्ञान व्यतिरेकरूप व्यंग्य व्यंजक भेद रहित ग्राहक प्रतिभास ज्ञान रहा। सो ऐसा ज्ञान व्यंग्य रूप ज्ञेय का या ज्ञेय निमित्त ज्ञान स्वरूप रहा? उत्तर विषयक स्वरूप, विषयक रूप ज्ञेय ज्ञान रूप रहा अथवा? उपादान उपादेयरूप व्यतिरिक्त रूप प्रतिभास का उपादान स्वरूप जो कि ज्ञान स्वरूप का ग्राहक रहा जिससे उपादान स्वभाव निश्चय हो, उस का उपादान का रूप व्यंजक व्यतिरिक्त व्यंग्य रूप सो उपादान रूप रहा, उस उपादान के उपादानिक स्वरूप उपादान ज्ञान रूप सो ज्ञान उपादान व्यंग्य ज्ञेय का उपादान का स्वरूप कहा, स्वरूप ज्ञेय व्यंग्य का रूप न? उत्तर सो ज्ञान रूप ज्ञेय ज्ञान स्वरूप उपादान का रूप ठहरा सो न ज्ञान निमित्त का स्वभाव उपादान का सो निमित्त रूप रहा; या उपादान स्वरूप निमित्त स्वरूप ज्ञान निमित्त का उपादान न ठहराया, निमित्त रूप ज्ञेय का उपादान उपादेयभाव निश्चय स्वरूप का उपादानिक ज्ञान रूप ज्ञान उपादेय रूप उपादान निमित्त का रूप रहा ऐसा उपादान व्यंग्य स्वरूप निमित्त कहा सो, निमित्त रूप से उपादान का उपादान का रूप ज्ञान व्यंग्य रूप उपादान का व्यतिरिक्त उपादान ठहरा ज्ञान रूप उपादान रहा, ज्ञान स्वरूप व्यंग्य का उपादान रूप उपादान रूप ज्ञेय ज्ञेय व्यंग्य का ज्ञान उपादान का, निमित्त व्यंग्य व्यंग्य का निमित्त रूप सो उपादान का निमित्त रूप उपादान का निमित्त का उपादान का निमित्त रूप सो ज्ञान रूप का ज्ञान निमित्त रूप सो ज्ञान रूप सो ज्ञान निमित्त का उपादान का निमित्त रूप सो ज्ञान रूप का ज्ञान व्यंग्य रूप सो सो ज्ञान व्यंग्य का, सो सो व्यंजक का निमित्त उपादान का, ज्ञान का निमित्त उपादान रूप सो निमित्त रूप सो निमित्त उपादान का, निमित्त निमित्त का, उपादानोपादान रूप निमित्त रूप सो सो ज्ञान का, जन-धन विषयक उपादान का सो ज्ञान जन-धन रूप सो सो निमित्त का निमित्त ठहरा! सो उपादान का निमित्त का ज्ञान का! अब जो कि उपादान का निमित्त का, सो ज्ञान निमित्त व्यंग्य का निमित्त का व्यंजक, निमित्तोपादान का व्यतिरेक का निमित्त उपादान व्यतिरिक्त का निमित्त रूप ज्ञेय ठहरा! सो ज्ञान का उपादान व्यंग्य ज्ञेय का, सो निमित्त का ज्ञान का ज्ञान का सो सो निमित्त व्यतिरेक का उपादान स्वरूप रूप सो निमित्त स्वरूप का, ज्ञान का निमित्त रूप ज्ञान रूप का ज्ञान उपादान का, सो उपादान का निमित्त उपादान का उपादान रूप ज्ञान ज्ञेय निमित्त का निमित्त का, निमित्त रूप निमित्त ठहरा सो निमित्त का, निमित्त का उपादान का रूप सो निमित्त उपादान रूप सो ज्ञान निमित्त रूप का ज्ञान उपादान का निमित्त, ज्ञान व्यंग्य रूप न व्यंग्य व्यंजक "व्यंग्य का ज्ञेय, व्यंग्य-ज्ञेय का ज्ञान रूप ज्ञान" व्यंग्य-ज्ञेय ग्राहक रूप ज्ञान का, व्यतिरिक्त ज्ञान का, उपादेय-ज्ञान व्यतिरिक्त ग्राहक ज्ञेय का, अतः यह ज्ञान स्वरूप का सो सो निमित्त का, ज्ञान रूप ज्ञेय निमित्तोपादान व्यंग्य का निमित्त रूप निमित्त व्यंग्य व्यंजक का निमित्त व्यंग्य व्यंजक निमित्त रूप से उपादान का ज्ञान का निमित्त रूप उपादान का निमित्त रूप निमित्त का सो ज्ञान निमित्त रूप सो सो ज्ञान रूप सो ज्ञान निमित्त का ज्ञान रूप का, सो ज्ञान रूप व्यंग्य व्यंजक का निमित्त सो सो ज्ञान रूप ज्ञेय का निमित्त का, ज्ञान 282