भारतकोश
माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)

DevanagariHindipublished154 पृष्ठ

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इस घटना का प्रभाव जो पड़ा स्वभावतः... वह तो इस प्रकार प्रकाश में आ ही गया।परन्तु इस का एक प्रभाव जो जन मत पर पड़ाथा, वह प्रभाव उस समय तक के किसी घटना द्वारा भी साधारण जनता पर पड़ा, सर्वथा नवीन, अकल्पित कालीन, समस्त भारत पर प्रभाव था। यह कहना भूल है, महामना श्री जी राम-दास स्वामी का ही केवल प्रभाव था, जिस से समूचे भारत में हिन्दू चेतना जाग उठी। केवल एक ही कारण कभी भी ऐसा काम नहीं कर ले यह बात ठीक है। पर इस घटना विशेश का जो प्रभाव पूरे भारतवर्ष पर हुआ वह कम नथा। दक्षिण छोर से उत्तर कटक तक इस घटना का समाचार फैल ही रहा था। इस घटना का प्रभाव क्या था इसका फल यह देखना होगा कि इस अधिकार चेष्टा से उत्पन्न शक्ति से क्या लाभ हुआ था? केवल एक घटना मात्र से सम्पूर्ण देश में ही तो स्वराज्य का संचार नहीं हुआ था, पर इस से इस भावना युक्त सारा भारत हो तो अवश्य ही जासकता था। हाँ, यह बात तो जरूर हुयी। हिन्दू भावना को इस प्रकार आगे आने का मार्ग मिल ही गया। इस महान परिणाम का सार तो यही था, कि भारत भर की जनता को विश्वास हो चलाथा कि जिस बात को, वह असम्भव समझती थी वह पूरी तरह से एक दम से सत्य सिद्ध हो चली थी। उस घटना ने प्रत्येक हिन्दू के हृदय में उत्साह भर दिया था, वह यह बात भली ही तरह सोचने पर विवश हो गए, कि जब एक हिन्दू राजा ने इन यवनों द्वारा अपमानित हो अपने स्वाभिमान को न छोड़ा, फिर अन्य क्यों न छोड़ें, विचारें वे? हिन्दू-धर्म रक्षक तो वह बन कर सब के सम्मुख आया ही था, इसमें सन्देह ही नहीं! इस प्रभाव से क्या लाभ हुआ यह समझना भी सरल हीथा! केवल एक ही बात नहीं थी, जिससे कि काम चल ही जाता था? यह बात साधारण बात नहीं, सम्पूर्ण हिन्दु स्थान जाग उठा। केवल एक ही बात को नहीं, अब तो उसके पूरे रूप को देखा जाने लगा। इसका फल यह था, कि अपने पूरे देश में इस ही रूप से शिवाजी को देखा जाने लगा। इस लिये भारत व्यापक रूप से इस बात का प्रभाव पूरे देश भर पर पड़ा हुआ था? यह प्रभाव कैसा था, अच्छा था? तो उस समय के सब लोग कह ही सकते होंगे यह, प्रभाव कैसा था? तो उस समय के लोग अवश्य ही इस का कुछ तो फल ही पायेंगे! शिवाजी का विचार तो भारत भर को एक ही रूप में देखना था। क्या प्रभाव पड़ा था? प्रभाव पड़ा, सो तो बहुत समय पश्चात् देखने को मिला। पर बात हिन्दू चेतना द्वारा सम्भव थी, इसलिए सभी उस विचार द्वारा बंधे थे, इस बात द्वारा स्पष्ट देखा गया था। जो रूप आज हिन्दू धर्म का है, वह केवल इस बात का परिणाम ही था कि शिवाजी, के नाम से सारा भारत एक बार फिर जागृत हो ही उठा। केवल धर्म की रक्षा अथवा हिन्दू--धर्म का ही? रक्षा कार्य नहीं, सो इसके द्वारा सब काम हुआ, जो शिवाजी का नाम ही भारत में सदा अमर रहने वालाथा। केवल धर्म ही नहीं पर अपने देश की रक्षा का विचार था? हर बात पूर्ण रूप से हिन्दू धर्म के साथ ही तो जुड़ी हुई थी? केवल यह ही कारण तो नहीं बन-सका, जिसे जानकर, कार्य द्वारा ही परिणाम प्राप्त हुआ था? इस परिणाम को ही, सब लोग देख रहे थे। वह बात यह थी कि सब लोग एक ऐसा समय, पा ही तो गये थे, मुसलमानों के प्रभाव से मुक्त, जो अत्याचार आज तक फैला हुआथा उस से जन समाज पीड़ित था। उस, से छुटकारा पाना उन सब भारतीयों अथवा हिन्दू जन को असम्भव लगता था। इस लिये, जनता सब समय, कष्टों से ही मुक्ति के उपाय सोचती थी। केवल यह उपाय केवल यही था, जिसका कि नाम हिन्दू धर्म का था। यह सब लोग जान गये, कि हिन्दू धर्म को नष्ट करने का पूरा प्रयत्न मुगलों द्वारा हो रहा था, इस लिये धर्म ही; समाज का तो अंग था, जो केवल धर्म ही; रूप विकृत रूप से हुआ था, सो इस बात को ध्यान में रख कर ही बात की पूरी योजना बनी थी, सो इसका फल यह था, प्रभाव था? तो अवश्य, ऐसा प्रभाव ही जन के मन पर पड़ा था, केवल हिन्दू भावना जाग उठी, बल्कि सब ही प्रकार लोग अपने आप को समर्थ समझने लगे थे। उन को नया रूप प्राप्त हुआ

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