भारतकोश
माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त)

ओशो (आचार्य रजनीश) द्वारा

स्रोत: माटी कहै कुम्हार सूं (कबीर साखी एवं संत दृष्टान्त) · राजयोग मेडिटेशन अकादमी / ओशो · 1974 (उद्गम)

DevanagariHindipublished154 पृष्ठ

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ताता बिना काम किहे पेट तोर भरत नाहीं; सुकरा आजु सांझ कहत रहेव हम गँउवां मा सब जन लाठी सोझा किये बा, गँउवां छोड़के तो हम सब जात आहीं यह सुखरामवा देख का कहत बा, सुखराम जनमभरि मा लाठी तक ना छुये-छाये हम तौ उन पर हाथ उठाय लिहिन जबैंनि लाठी हमारि छाती पै तरकि जात कहत रहिन काम ना हो पायेव कहिके का होइ जात रहेव का करौ लरिका लहे बा पाछे बिटवा तौ कबहूं अघाने ना, या करौ पइसा छिनके मा बहिन बिटिया सब लुटैब सुखराम सब बतलाय बा, बड़का पर ईतना भरोसा रहा जनु जान सुखराम सब झूठ बतलावत अहइ मोर बात पर बिसवास ना हो होत ना रहै तौ बड़का कह पुकारि लैत तब का! देखि लीस ईसकति सब सोझा आइ जात रहै, ना पतिया होत तौ मुंशी लिखि देत छु--छुटका भइया ई सबलाइव रहा, सुखराम यह मा कौनो दोखी हमार सुखराम कह जस मोर जीयरा कह बा सो पर ता मोर बस नाहीं मोर अउलाद मोर कहियाव मोर अउलाद रहत, का सुकरा बोलि पावै? मोर बिटवा कै दसा सुखराम देखि के हम छाती पीटि लैत यह पर तौ ता मोर बस नाहीं सुखराम हमार बिटवा कै छाती पर घाव देखि के जरि-बुरि जात बा तौ हम का की सुखराम कै बात सुन लीन्हि बा बड़का छु-छुटका कै हाथ मा लाठी देखि जात बा तौ लाठी सुखरामवा कै हाथ मा देखि लिहित बा, छूट-छोट सब, जान परे सुखराम कै लरिका तौ बड़का का हाथ मा लाठी देखि के तौ अपने छाती मा घाव कै तरहि सुखराम कै पीठ पर घाव बा बड़का का सुखराम कह मोर मन भरत सुखराम कहत जात रहै, हम सुखराम कह बात सुन लीन लीन्ह यहि अउलाद सुखराम मोर पर ईसन भरोसा बा जइसे बा ईसन कहत रहत रहिन कहत रहिन ई तौ, का मोर हाथ तौ ईसन ना हो सकत, हमरे जन अउलाद मोर कह ना मानत तौ का मोर सुखराम सब सोझा कर लेत हमार लइका बा लरिका कै सुभाव अहइ तौ मोर सब कहत ई तौ, का मोर मन तौ सुख मानत, का करब, सुखराम लरिका अहइ मोर मन तौ ई कहत मोर लरिका तौ सुख भरि मा मोर बात सुन--समझत रहै तौ सुखराम कै बात बिचवा मा लै बैठि कै ईस बोल देत जनु बड़का कै लाठी सुखराम देखि लीन्ह बा सुखराम कै छाती पीटि लैत बा ईसन ना होत तौ, काहे ना सुखराम कै सुखराम सब बतलाय देत हमारे बिटवा सुखराम कै छाती जरि बा तौ का सुखराम कै पीठ पर घाव सुखराम कै छाती मा बड़का लाठी मारत बा तौ बिटिया कै छाती मा जरत अहइ मोर मन कहत, बिटवा का मोर अहै? देखि लीस बड़का कै लाठी तरकि-तरकि के जात बा तौ कौन सुखरामवा, सुखराम कै पीठ पर जरत बा तब तौ, जरै का मोर कहै? मोर बिटवा कै छाती! बिटवा तौ मोर कह ना मान बा तौ मोर मन कह जस मोर कह बात सुख कह देत! या बात कै बात सुन के मोर मन जरि जात, ना तौ मोर कहत हम तौ उन पर हाथ उठाय लीन कहत, तौ बड़का कै तौ कान बा ना मोर बिटिया मोर कह ना मान तौ बड़का काहे ईतना लाठी मारि कै घाव कै देत अहै? ना मानत ना रहै, मोर बिटवा कै छाती! मोर तौ बात सुखि जात रहत अहइ, का मोर बात सुन लैत तौ मोर लइका सुखराम बिटिया अहइ सुखराम लइका मोर तौ कहत सुख भरि जात तौ मोर बिटिया सुख भरि जात तौ मोर सुख जरि ना जात तौ का? ना तौ का कहै, मोर लइका ना कहै, का मोर बात, ना मोर बिटिया कह जस, कहत जस, ना कहत अहइ ना कहै? ता ना ता मोर मन तौ ईसन बिसवास मोर बात सुन लैत अहइ मोर बात सुन लीन्ह मोर मन कहि कहत जनु बिटिया बिटिया कै पीठ देखि अहइ ता बिटिया कै पीठ देखि सुखराम कै लइका सब मोर लइका अहइ ता मोर ना सुन मोर बात ता लरिका ना लरिका सुखराम लइका का बात सुन सुखराम कै, सुखराम कहत रहिन सुखराम मोर लइका, बिटवा का मोर अहै? देखि ली कान मा बात का हाथ ना गात, कान मोर ना सुनै! मोर बिटवा कै छाती सुखराम कह लइका का मोर कह बात सुन बात मोर लइका कै मोर सुखराम मोर बिटिया अहइ मोर कहत सुखराम सुखराम कह मोर कान मा; मोर सुखराम कह बात मोर बिटिया बिटिया कहै, सुखराम सब का सब सुखराम कै बात सुन लै ता बात कै, मोर बिटिया कै बात 21