पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३१६ पद्मावत। तूँ शशिबदनें जगतैं उजियारी। कै हरलीन्ह कीन्ह अँधियारी॥ तू गजगाँमिनि गर्व गहेली। अबकसअँस सतछांड़ दहेली॥ तूहर लंक हेराई केहरँ। अब कंसहार करेसि है हर॥ तू कोकिलि बैनी गजमोहा। कौनव्याधहोयगहीनिछोहा॥ दो० कमलकरी तू पद्मिन, गइ निशिं भयौ बिहान। अबहुँ न सम्पुट खोलिसि, जोरिउठाजगभानै॥ भाननाउँ सुनिकमल विकासा। फिरिकै भँवरलीन्ह मधुवासा॥ शरदचन्दें मुखजीभ उघेली। खंजननयनैं उठी करकेली॥ बिरह न बोल आव मुखमाई। मरमर बोल जीववरियाई॥ डोलबिरहदारुनैं हिये कांपा। खोलनजाय विरहदुखझांपा॥ उदंधिसमुद्रजंसतरंगै दिखावा। चेपंघूमहिंमुखबात न आवा॥ यह शठ लहर लहर परधावा। भँवरपरा जिव थाह न पावा॥ सखी आन विष देवतो मरनू। जीव न पेट मरन का डरनू॥ दो० खंनै उठै खनवूड़ै, अस हिय कमल सकेंत। हीरामनहिं बुलावहि, सखी कहन जिव लेत॥ चेरी धाय सुनत खन धाई। हीरामन लै आय बुलाई॥ जनहु वैद्य औषध लैआवा। रोगियें रोग मरतजिव पावा॥ सुनत अशीश नयनधनखोली। बिरहबैनकोकिलजिमि बोली॥ कमलहि बिरहबिथा जसबाढ़ी। केशरै बरनपीर हिय काढ़ी॥ कित कमलहि भा प्रेम अँगूरू। जो पै गहन लेह दिन सूरूँ॥ चाँद कैसा मुँह १ दुनियां २ हाथीकी चाल ३ गुरुर ४ भारी ५ कमर ६ चीता ७ आवाज ८ बेदर्द ९ रात १० सूर्य ११ कातिककी पूरनमांसीका चांद १२ ममोलाकी आंख १३ भारी १४ मुश्किल १५ दिल १६ नामसमुद्र १७ लहर १८ आंख १९ कभू २० बन्द २१ जिसतरह २२ पीला २३ सूर्य २४॥