भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 150

पद्मावत। १४६ जर पलाश कोइला के भेसू । तब फूला राता हो टेम् ॥ दो० पान सुपारी खैर तहँ, मिलै करै चकमून। तवलग रंग न राची, जबलग होय न चूना॥ धंन याका सुरँगका चूना। जेहि तननेह दगधै तेहिदूना॥ हौं तुम नेह पियरभा पानू। पेड़ी हुतसन रास बखानू ॥ सुनि तुम्हार संसार बढ़ौनी। योग लीन्ह तनकीन्ह गड़ौनी॥ करहि जो किंगिरीले बैरागी। नेवती होय बिरहकी आगी॥ फेरफेर तन कीन्ह भुजोना। औंट रखंग हिरदय अंचौना॥ सूख सुपारी भा मनमारा। शिरसरोत जनु करवट सारा ॥ हाड़ चून भै बिरहें दही। जानै सोइ जो दगधै इमि सही॥ दो० कै सुजानि बहुपीरा, जेहिं दुख ऐसो शरीर। रक्त पियासे जे अहहिं, का जानै परपीर ॥ योगिहि बहुतछन्द औराहीं। बूँद सेवाती जैसे पराहीं ॥ पड़हिं भूमि परहोय कंचूरू। पड़हिं कदेलिपर होयकपूरू ॥ पड़हिं समुद्र खारजल ओहीं। पड़ेंहि सीप सब मोती होहीं॥ पड़हिं मेरु पर अमृत होई। पड़हिंनागमुख विषहोयसोई ॥ योगी भँवर निठुर ये दोऊ । केहि आपने से कहो सो कोऊ॥ एकठांव यहिथिर न रहाहीं। रसले खेलै अन्तकहँ जाहीं ॥ होयगृही पुनि होय उदासी। अन्तकाल दोनों विश्वांसी ॥ दो० तासों नेह जोदृढ़ करहिं, थिर आयहिसहदेश। योगी भँवर भिखारी दूर रहहिं आदेश ॥ रेझा १ पञ्चायत २ जलन ३-१० चढ़ाई ४ गढ़ौता ५ हाथ ६ महिमान ७ भुजना ८ शिरकटाना ६ इसतरह ११ मकर करना १२ ज़मीन १३ नरकधूर १४ केला १५ पहाड़ १६ जगह १७ क़ायम १८ जाना १६ बेसब्रर २० मज़बूत २१ सलाम २२ ॥