पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । १५१ भल भांती मैं रचना राची। मारेसि तोहि सबै कै काची॥ पाक उठायों आशक रीता। हौं जीतहि हारा तूँ जीता॥ मिलके युगनहिं होहुँ निरौरी। कहां बीच दोती दिन हारी॥ अब जिव जन्म जन्म तुहि पासाँ। चढ़यों योग आयों कैलासा॥ दो० जाकर जिव बसि जेहि से, तेहि पुनि ताकर टेक। कनकें सुहागन बिछुड़ हि, औट मिलहिं जो एक॥ वेहँसीथनै सुनिके सत बाता। निश्चै तू मोरे रँगराताँ॥ निश्चै भँवर कमल रसरसा। जो जेहि मन सो तेहि मन बसा॥ जब हीरामन भयो सँदेशी। तूहुत मँडफ गयौ परदेशी॥ तोर रूप तस देखेउँ लोनाँ। जनु योगी तू मेली टोना॥ सिधि गुटका जो दृष्टि कमाई। पारे मेल रूप बेसं याई॥ भुक्ति देन कहँ मैं तुहि डीठाँ। कमल नयन होय भँवर जो बैठा॥ नयन पुहुपे तू अलि भ्रासोभी। रहा बेध तस उड़सि न लोभी॥ दो० जाकर आश होय जे कहँ, तहँ पुनि ताकर आस। भँवर जो दाढ़ौ कमलका, कसन पाव रस बास॥ कौन मोहनी धौं हुत तोही। जो तोहि बिथा सो उपर्जी मोही॥ बिन जलमीनें तपै जस जीउ। चातुर्क भयौं कहत पिउ पीउ॥ जरों विरह जस दीपक बाती। मँग जोवत भइ सीप से बाती॥ डार डार ज्यों कोयल भई। भयौं चकोर नींद निशँ गई॥ मोरे प्रेम प्रेम तुहुँ भयो। राता हेम अगिन ज्यों तयो॥ हीरादि पहिं जोसूर उदोती। नाहत कित पाहनैं कहँ योती॥ अलग १ दो तीन का क्या कामहै २ मददगार ३ सोना ४ पद्मावत हँसी ५ यक़ीन ६ मस्त ७ खूबसूरत ८ निगाह ९ पारा मिलाके चांदी किया १० भीख ११ देखना १२ फूल १३ भंवरा १४ आशिक़ १५ पैदा होना १६ मछली १७ पपीहा १८ राह १९ रात २० लाल सोना २१ चमक २२ सूर्य्य २३ पत्थर २४॥