भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 154, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 154

पद्मावत। १५३ विहँसी¹ धन सुनके सतभाऊ। हों रामा तू रावण राऊ ॥ रहि जो भँवर कमलकी आसा। कस न भोग मानै रसबासा॥ जस सत कहा कुँवर तू मोही। तस मन मोर लाग पुनि तोही॥ जबहुत कहिगा पंख सँदेशी। सुन्यों कि आवाहै परदेशी ॥ तबहुत तुम बिन रहै न जीउ। चातुकै² भयों कहत पिउपीउ ॥ भयों चकोर सो पन्थे³ तिहारे। समुद्रसीप जस नयन पसारे ॥ विरह भयों देंहि⁴ कोयलकारी। डार डार जिमि पीउ पुकारी॥ दो० कौनसोदिनजबपिउमिलै, बहुमन रातौ जासु । वह दुख देखे मोर सब, हौं दुख देखों तासु ॥ कहि सतभाव भई कँठलागू। जनु कंचन⁵ औ मिला सुहागू॥ चौरासी आसन पर योगी। षटरस बन्दक चतुर सो भोगी॥ कुसुमँमाल⁶ अस मालति पाई। जनु चम्पा गँहि डार नवाई ॥ कलीवेध⁸ जनु भँवर लुभाना। हनों राहु अर्जुन के वाना ॥ कंचने॑ कली जड़ी नगज्योती। वरमा सों बेधा जनु मोती ॥ नाँग॑¹ जानि कीरे॑² नख दिये। अधरै॑³ आम्बरस जानहु लिये॥ कौतुककेल करहिं दुख नसा। कन्दैहिं कुरलहि जनुसैरैं हँसा॥ दो० रही वसाय वासना, चोवा चन्दन मेदे॑⁶। ३१६ जो अस पद्मिन रँवी, सो जानै यह भेद ॥ रतनसेन सो कन्त सुजानू। षटरस पण्डित सोरह बानू ॥ तस द्वै मिले पुरुष औ गोरी। जैसी विछुड़ी सारस जोरी ॥ १ हँसी १ पपीहा २ राह ३ जलना ४ दीवाना ५ सोना ६ कुसुमकी जोड़ी की तरह छाती ७ पकड़ना ८ कली में भँवरा ने सूराख किया ६ तीर निशाने पर मारा १० सोने की कलीसा बदन मोती की तरह वरमा से बेधा ११ तोता १२ होठ १३ कुल्लेल १४ तालाब १५ अतर १६ भोगना १७॥

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य) · पृष्ठ 154, कुल 318 में से · BharatKosha