पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 162, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंभये गृहस्त सब लखपती, घरघर मानहु राज ॥ पद्मावत सब सखी बोलाई। चीर पटोरे हार पहिराई ॥ शीशं सबन के सेंदुर पूरा। शीश पूर सब मांग सिंदूरा ॥ चन्दन अगर चित्रसम भरी। नयन चार जानहुँ औतेरी ॥ जानु कमलसँग फूली कोई। औ सो चांद संगतंरई उई ॥ धन पद्मावत धनतोर नाहूँ। जेहि अभरण पहिरा सबकाहू॥ बारह अभरण सोरह शिंगारा। तोहिसोहेपियर्शोशमस्यारा ॥ शशि सुकलङ्की राहुहि पूजा। तुइनिकलङ्कनकोइसरं दूजा ॥ दो० काहूँ बीन गहा करै, काहूँ नाद मृदंग । सब दिन अनन्दबधावा, रहसकूद इकसंग ॥ पद्मावत कहि सुनहु सहेली। हौं सों कमलतुमकुमुदने बेली ॥ कलश मानिहौं तेहिदिनआई। पूजा चलो चढ़ावहिं जाई ॥ मँझै पद्मावतका जो विवानू। जनु परभाते उठे रतिभानू ॥ आस पास वाजत चौडोला। झाँझे मृदंगे झाँझ डफ ढोला ॥ एक संग सब सोंधी भरी। देव दुवारे उतर भईं खरी ॥ अपने हाथ देव अन्हवावा। कलशसहसें इकघूंटैभरवावा ॥ पोता मँडफ अगर औ चन्दन। देवभशअरगजै औ बिन्दन ॥ दो० कै प्रणाम आगे भई, विनयं कीन्ह बहुभांति । रानी कहा चलहु घर, सखी होत है राति ॥ भइनिशै धने जसशौशि परकैसी। राजेदेखिभूमि फिरबसी ॥ किस्म कपड़ा १ शिर २ तसवीर के बराबर ३ छोटे नखत ४-६ कोका- बेली ५-१२ खाविंद ७ ज़ेवर ८ चाँद ६-२७ बराबर १० हाथ ११ बीच १३ भोर १४ लाल सूर्य्य १५ नाम बाजा १६-१७-१८ सहेली १६ हज़ार २० घीव २१ खुशबू २२ दंडवत् २३ आजज़ी २४ रात २५ पद्मावत २६ रोशनी २८ ज़मीन २६ ॥