भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 164, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 164

पद्मावत । १६३ चन्दन चीर पहिर धन अंगा। सेंदुर दीन्ह बेहँसि भरमंगा ॥ कुसुमहार औ परबलँबासू। मलयागिरि छिड़ैंका कैलासू ॥ सूर सेपेती फूलन दासी। धन औ कन्त मिले सुखबासी ॥ पियसँयोगैं धन यौवन बारी। भँवर पुहुपसँग करहिं धमारी ॥ होय फाग भल चाचर जोरी। बिरह जरायदिन्ह जसहोरी ॥ धनशशि सीत तपी पियसूरू। नखतशिंगार होंहिं सबचूरू ॥ दो० जेहि घर कंता ऋतुभली, आव बसन्ता नित्त । सुखभर आवहिं देवँहरे, दुःख न जाने कित्त ॥ ऋतु ग्रीष्म की तपननहिं तहां। जेठ असाढ़ कन्तघर जहां ॥ पहिरे सुरंग चीर धन झीना। परमलै मेदरहीं तन भीना ॥ पद्मावत तन सीरे सुबासा। नैहर राज कन्त घर पासा ॥ औ बड़ि जूड़ तहां सोनारों। अगर पोत सुखै नन्तउहारा ॥ सेते बिछावन सूर सेपेती । भोग बिलास कराहमुखसेती॥ अधर तँबोर कपूर भीउसैना। चन्दन चरच लाव नितबैना ॥ भा अनन्द सिंहल सब कहूँ। भागवन्त कहँ सुख ऋतुछहूँ ॥ दो० दाड़िम दाखें लेहिरस, बरसहिं आंब छुहार। हरिय रतन सोतों कर, जो अस चाखनहार ॥ ऋतुपावस बरसै पिव पावा। सावन भादौं अधिकै सुहावा ॥ पद्मावत चाहंत ऋतु पाई। गगनै सुहावनभूमि सुहाई ॥ कोकिल वैन पांत बर्गे छूटी। धनै निसरी जनु बीरबहूटी ॥ पद्मावत १-२७ खुशबूदार २-चन्दन ३ तोशक लिहाफ़ ४-१७ मुला- क़ात ५ फूल ६ चाँद ७ ठंडा ८-१३ गर्म ९ सूर्य १० महादेवजी ११ बहुत खुशबू १२ रात के रहने का मकान १४ फ़र्श १५ सफ़ेद १६ होंठ १८ अनार १६ अंगूर २० तोता २१ बरसात २२ बहुत २३ आसमान २४ ज़मीन २५ बगुला २६ ॥