पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६४ पद्मावत । चमकबीजैं बरसै जल सोना । दादुरे मोरशब्दै मुठलोना ॥ रँगरातीपिय सँग निशँ जागी । गरजेगगनं चौंक कँठलागी ॥ शीतल बुन्द ऊँच चौपारा । हरियर सब देखै संसारा ॥ मलयसमीर वास सुखबासी । बेल फूल सेज सुख दासी ॥ हरियर भूमि कुसुम्भी चोला । औधनपियसँग रचो हिंडोला ॥ दो० पवन झकोरे हैं हरषै, लागै शीतल बास । धनजानी यहि पवनहै, पवनसो अपने पास॥ आयशरदऋतुअधिकैपियारी । नाउँकुवारकातिकउजियारी ॥ पद्मावत भइ पूनोकलों । चौदह चांद उई सिंहला ॥ सोरह किरण शृंगार बनावा । नखतभरामूर्य्यशशि पावा ॥ भा निर्मलै सब धर्ति अकासू । सेज सँवार कीन्ह बलदासू ॥ श्वेतैं बिछावन औ उजियारी । हँसहँस मिलहिंपुरुषऔनारी ॥ सोने फूलहिं पृथिवी फूली । पियधनसों धनपियसोंभूली ॥ नैंधै अंजनदैखंजनै देखावा । होय सारस जोरी रस पावा ॥ दो० यहिऋतु कन्थापासजेहि, सुखतिनके हियमांह । धन हँस लागी पियगले, धनगल पियकेबांह ॥ आयशिशिरऋतुतहां न सीऊ । अगहन पूष जहां घरपीऊ ॥ धनै औपियमहँखीवै सुहागा । दुहूँअंगें एकै मिललागा ॥ मनसों मन तनसों तन गहा । हियें सोंहिय बिचहारनरहा ॥ जानहुँ चन्दन लाग्यो अंगा । चन्दन रहे न पावै संगा ॥ भोगकरहिं सुख राजा रानी । वहँ लेखे सबसृष्टि जुड़ानी ॥ बिजुली १ मेढक २ आवाज़ ३ रात ४ आसमान ५ हवा ६ ज़मीन ७ १४ खुश ८ बहुत ६ पूर्णमासीका चाँद १० चाँद ११ साफ़ १२ सफ़ेद १३ आँख १५ ममोला १६ जाड़ेका मौसिम १७ पद्मावत १८ जाड़ा १६ वदन २० छाती २१ सारी दुनियां २२ ॥