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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 166

पद्मावत । १६५ जूझैं दुहूँ यौबनें १ सों लागा । बिचहुतसीवैं जीव लै भागा ॥ दुइ घट मिल एकै है जाहीं । ऐसि मिलहिं तबहीं न अघाहिं ॥ दो० हंसा केल करहिं ज्यों, सरवर्रै, कँदनैहि दोउ । सेव पुकारे पारभा, जस चकवीक बिछोउ ॥ ऋतुहेमन्त सँग पियो पियाला । मानहुँ फागुन सुखसेवसाला ॥ सूर संपेती महँ दिन राती । दगल चीर पहिरहिं बहुभांती ॥ घरघर सिंहल है सुख भोजू । रहा न कंतहूँ दुखकर खोजू ॥ जहँ धनपुरुष शीतनहिंलागा । जानहुँ काग देख सर भागा॥ जाय इन्द्र सों कीन्ह पुकारा । हों पद्मावत देश निसारा ॥ यहि ऋतु सदा संग मैं सोवा । अब दरशनतें भरा बिछोवाँ ॥ अब हँसके शशि सूरहँ भेटा । अहाजो शीत बीचहुत मेटा ॥ दो० भयो इन्द्रकर आयसुं, पैरैसे हावहिं झइसोय । काहु काहुकी पीरभा, कोहि काहु की होय ॥ नागमती चितौर पँथहेरैं । पिययोगी पुनि कीन्हन फेरा॥ नागर नारि काहु बस परा । तैं बिमोहें मोसों चित हरा ॥ सुवा कालै होय लैगा पीव । पीव न जात जातपर जीव ॥ भयो नारायण बावन किरा । राज करत नलराजा छरा ॥ करणैं बान लीन्हों कै छंदू । भर्रथींहिं भयो झिलमिलीं नन्दू ॥ मानत भोग गोपिचँदैं भोगी । लैअपसेंवां जलंधर योगी ॥ लैकेकंथं भाकुररैं लोपी । कठिनबिछोह जियहिकिमिगोपी ॥ दो० सारस जोरी किमिहरी, मारगयो किन खांग ।


लड़ाई १ जवानी २ जाड़ा ३ तालाब ४ सुख से कलोल ५ तोशक लि- हाफ़ ६ अलग ७ चाँद ८ सूर्य ६ हुकुम १० तसवीर ११ राह देखना १२ मोह लेना १३ मौत १४ नाम राजा १५ नाम योगी १६-१८ दुख पाया १७ छिपना १६ खाविन्द २० कौआ २१ ॥