पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६६ पद्मावत । झुरझुरमांजरधनेँ भई, विरहकी लागी आग ॥ पिय बियोगैं अस बावर जीव । पपिहा जस बोलै पिय पीव ॥ अधिकैं कामदधै सो कामा । हरिलै सुवागयो पिय नामा ॥ बिरहबाण तस लागनडोली । रक्तपसीज भीज तनचोली ॥ संगही हीरहार हिय वारी । हरहर प्राण तँजी अवनारी ॥ खनं इक आव पेटमहँश्वासा । खनहिजाय जिवहोयनिरासा॥ पवनडुलावहिंसींचहिंचोला । फिरकेनारि समुझमुखबोला ॥ प्रान पयानँ होत को राखा । कोयल औचातुकैँ मुखभाखा ॥ दो० आह जो मारी विरहकी, आग उठी तेहि हाग । हंस जो रहा शरीर महँ, पांख जरे तब भाग ॥ पाटँ महादेव हियेँ १० निहारू । समझजीव चितचेत सँभारू ॥ भँवर कमलसँग होय मिलावा। सँवरनेह मालति पुनिआवा ॥ जैसी पपीहा स्वातिहिंप्रीती । टेक प्यास बांधे जिय सेती ॥ धर्ती जैसी गगनैं सों नेहा । पलट फिरै वर्षाऋतु मेहा ॥ पुनिबसन्तऋतु आव नवेली। सुरससुमधुकेरें सारस वेली ॥ जन अस जीव करेसि तू बारी। वहतरुवरै पुनि उठहिं सँवारी ॥ दिनदशबिनजल सूखा कांसा। पुनि सोइ सरवर सोई हांसा ॥ दो० मिलहिं जो बिछुड़े साजन, कैकी भेंट कहन्त । तपन मिरगसर जिनिसहैं, ते अद्रापल हन्त ॥ चढ़ाअसाढ़गगनैं घनैं गाजा। साजा बिरह हुंददल बाजा ॥ धूम श्याम धौरी१६ घन धाये । श्वेतध्वजौं बँकँपांति दिखाये ॥
पाद-टिप्पणी (Footnotes at the bottom): नागमती १ दुख २ बहुत ३ जलना ४ छोड़ना ५ पल ६ कूच ७ पपीहा ८ तख़्त ६ दिल १० आसमान . ११-१४ भँवर १२ पेड़ १३ बादल १५ भूरी काली सफ़ेद १६ सफ़ेद पताका १७ बगुला १८ ॥