पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 168, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । १६७ खङ्ग बीजु चमकै चहुँ ओरा । बुन्दबान बरसहिं घन घोरा ॥ उनई घटा आय चहुँ फेरी । कंत उबार मदन हौं घेरी ॥ दादुर मोर कोकिला पीउ । गिरहि बीज घट रहै न जीउ ॥ पुष्य नक्षत्र शिर ऊपर आवा । हौं बिननाहँ मँदिर को छावा ॥ अद्रा लाग बीज भुइँ लेई । मो पिय बिन को आदर देई ॥ दो० जेहिं घर कंता ते सुखी, तेहि गारू तेहिं गर्व । कन्त पियारे बाहरे, हम सुख भूला सर्व ॥ सावन बरस मेह अवानी । मरन परीहौं विरह झुरानी ॥ लाग पुनरबसु पीउ न देखा । भइबावर कहँ कन्त सरेखाँ ॥ रक्त की आंसुपरहिं भुइँ टूटी । रंग चलीं जनु बीरबहूटी ॥ सखिन रचा पियसंग हिंडोला । हरियर भूमि कुसुम्भी चोला ॥ हिये हिंडोल जस डोलै मोरा । विरह झुलावै देइ झकोरा ॥ बाँटे असूझ अथाह गँभीरी । जिव बावरभा फिरै भँभीरी ॥ जगजल बूड जहाँ लग ताकी । मोरनाव खेवकै बिन थाकी ॥ दो० पर्वत समुद्र अगम वन, औ बीहड़ घन ढाँख । किमकर भेंटूं कन्त तुम, नामो पांव न पंख ॥ भरिभादौं दुपहर अति भारी । कैसें भरौं रयनि अँधियारी ॥ मँदिरसून पिय अन्तहि बसा । सेज नागभइ दहिदहि डंसा ॥ रहौं अकेल गहैं इक पाटी । नयन पसार मरौं हियफाटी ॥ चमकबीज घन गरजत त्राशा । विरहकालहोय जीवनिराशा ॥ बरसै मघौ झकोर झकोरी । मोरदुइनयन चुवैं ज्यों ओरी ॥ तलवार १ बिजली २ कामदेव ३ मेढक ४ ख़ाविन्द ५ गरूर ६ तुला- हुआ ७ होशियार ८ लोहू ६ ज़मीन १० दिल ११ राह १२ गहरी १३ मल्लाह १४ नामनखत १५ ॥