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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 169

१६८ पद्मावत । धने सूखै भर भादों माहां । अबहुँन आयन सींचेसिनाहां ॥ पुरबा लाग भूमि जल पूरी । आँक जवास भईहौं झूरी ॥ दो० जलथल भरे अपूरसब, धर्ति गगन मिल एक । धन यौबन अवगाहँ महँ, वय बूड़ी पिय टेक ॥ लाग कुँवार नीर जस घटा । अबहुँ आवरे प्रीतम लुटा ॥ तुहि देखों पिय पलुहेकर्या । उतरा चीतं बहुतकर मयों ॥ उये अगस्त हस्तै तन गाजा । तुरी पलान चढ़े रण राजा ॥ चित्रा मीत मीन घर आवा । कोकिल पीव पुकारत पावा ॥ स्वाति बूँद चातृकें मुखपरी । सीप समुद्र मोति बहुभरी ॥ सरवर सँवरि हंस चलिआये । सारस कुरलैं खंजन दिखाये ॥ भई निराश कास वन फूले । कन्त न फिरे विदेशहि भूले ॥ दो० बिरहहस्ति तन शाँलै, घाय करै नितचूर । आय बचाओ वेगें पिय, गाजहुहोय सँदूर ॥ सिंह कातिक शरदचन्द उजियारा । जगशीतल मोविरहिनजारा॥ चौदह किरण चन्द परकाशैं । जनहु जरै सबधर्ति अकांशू ॥ तन मन सेज करै इक दाँहू । सबकहँ चन्दभयो मोहिंराहू ॥ चहुँ खण्ड लागै अँधियारा । जो घर नाहीं कन्त पियारा ॥ अबहुँ निठुर आव यहिब़ारा । पर्व देवारी हो संसारा ॥ संगझुमकगावाहिं अँग मोरी । हों झुरवों बिछुरी जेहिजोरी ॥ जेहिघर पियसोमनोरथ पूजा । मोकहँ बिरह सौतदुखदूजा ॥ दो० सखि मानैं त्योहार सब, गाय देवारी खेल । औरत तथा नागमती १ खाविन्द २ नामनखत ३-१०-१२-१३-१५ ज़मीन ४ आसमान ५ गहिरा ६ पानी ७ लौटके ८ बदन हरा होजाय ६ मेहेरवानी ११ घोड़ा १४ मछली १६ पपीहा १७ तालाव १८ ममोला १६ हाथी २० छेदना २१ जल्द २२ शेर २३ रोशन २४ जलाना २५ कामना २६॥