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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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१७० पद्मावत । आय सूरै है तपरे नाहां। तुहि बिन जाड़ न छूटे माहा॥ यही माह उपजी रस मूलू। तो सुभवँर मोर यौवन फूलू॥ नयनचुवहिं जस महवट नीरूँ। तेहिविन आग लागि शिरचीरूँ॥ टपटप बूंद परहिं जनु ओला। विरहपवन है मारै झोला॥ केहिक शिंगार को पहिर पटोरौँ। ग्रीवं न हार रहे है डोरा॥ दो० तुम बिन कन्त धन हरवी, तृणँ तृणवर झा डोलै। तेहि पर बिरह जराय के, चहै उड़ावा झोल॥ फागुन पवन झकोरे महा। चौगुन सीवँ जायनहिंसहा॥ तन जस पियर पात भा मोरा। तेहि पर विरह देइ झकझोरा॥ तरवर झरहिं फरहिं बनदांखा। भई उपन्तँ फूल फलशाखा॥ करहिं बनाफंते कीन्ह हुलासू। मोकहँ जगभा दून उदासू॥ फाग करहिं सब चांचर जोरी। मोतन लाय दीन्ह जस होरी॥ जो पै पिये जरत अस भावा। जरत मरत मोहिं रोस न आवा॥ रात दिवसँ निरभै जिय मोरें। लग्यो निहोरै कन्त जो तोरें॥ दो० यह तन जारों छौर कै, कहों कि पवन उड़ाव। मगँ तेहि मार्गै है परै, कन्त धरै जहाँ पांव॥ चैत वसन्ता होय धमारी। मो लेखे संसार उजारी॥ पंचम बिरह पनव शरैं मारी। रक्त रोय सगरे वन ढारी॥ बूडउठे सब तरवरैं पाता। भीज मँजीठ टेसु बनरातौँ॥ बौरे अम्ब फरे अब लागी। अबहुँ सँवरि घर आव सभागी॥ सहँसै भाव फूली बनपती। मधुकरैं फिरैं सँवरि मालती॥ सूर्य्य १ खाविन्द २ पानी ३ कपड़ा ४ जोड़ा ५ गरदन ६ हलकी तिनका से ७ जाड़ा ८ पेड़ ६-११ पैदा १० दिन १२ तथा न्योछावर हौं १३ राख १४ शायद १५ राह १६ तीर खींच के १७ पेड़ १८ लाख १६ लाल २० हज़ार २१ भँवर २२॥