भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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को बावर तुम वौरहि देखा । जो बावर मुख लागि सरेखा ॥ बावर तुम जो मूखे कहँआनी । तोहिन सभभी पंथंभुलानी ॥ पंख जो बावर रहि घर माटी । जीभ चढ़ाय भखै सब आँटी ॥ महिरावन की रीर जो परी । कहो सी सेतुबन्ध बुधि हरी ॥ यहि सो आहि महिरावनपूरी । जहँवां स्वर्ग नेर घर दुरी ॥ अब पछताव द्रव्य जस जोरा । करहु स्वर्ग पर हाथ मरोरा ॥ दो० जोहि जियत महिरावन, लेत जगतकर भार । जो मरहाड़ न लैगा, अस होय परा पहार ॥ बोहितें भवहिं भवै सब पानी । नाचैं राक्षस आशतुलोनी ॥ बूडहिं हस्ति घोर मानंवाँ । चहुँदिश आयजुरे मँसखंवा ॥ ततखन राजपंख एकआवां । शिखंर टूटजसडहनेडुलावां ॥ परांदृष्टि वह राक्षस खोटा । ताकेसिजैसुहस्तिं बड़मोटा ॥ आय वही राक्षस पर टूटा । भैंहिलेउड़ा भँवरजल छूटा ॥ बोहितें टूक टूक सब भई । ऐसो न जाना वह कहँ गई ॥ भये राजा रानी दुइ पाटा । दोनों बहे चले दुइ बाटाँ ॥ दो० कार्यों जीव मिलायके, मारकियो दुइ खण्ड । तन रोवत धरतीचला, जीव चला ब्रह्मण्ड ॥ मूरछ परी पद्मावत रानी । कहँजिव कहँपिव ऐस न जानी ॥ जानु चित्र मूरति गहि लाई । पाटा परी बही तस जाई ॥ जन्मत पवन सही सुकवारा । तेहिसो परादुखसमुद्र अपारा ॥ लक्ष्मी माय समुद्र की बेटी । ताकहँ लच्छ होय जें भेटी ॥ भूख के पास आये १ राह २ चींटी ३ नाव ४ उम्मेद पूरी हुई ५ हाथी ६-१३ आदमी ७ तुरंत ८ सौमुगी ६ पहाड़ १०. बाजू ११ निगाह १२ पकड़ना १४ नाव १५ राह १६ बदन १७ आसमान १८ तसवीर १६ दौलत २० ॥