पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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हौं वह सों वह मोसों राताँ । तिमिरैं बिलाय होत परभाताँ ॥ कमल के हिरदर्ये महँ जोगटा । हरियरै हार कीन्ह का घटा ॥ जाकर दिवसँ तेही पै आवा । कार रयैनि कित देखै पावा ॥ तुइउडुम्बर जेहि भीतर माँखी । चाहहिं उठहिं मरनकी पाँखी ॥ दो० धूप न देखी बिषभरी, अमृत सो सर पाव । जेहि नागिन डस सोमरे, लहर सूर्य्यकी आव ॥ फूलहिं कमल भानु के उये । पानी मैल होय जड़ छुये ॥ फिरहिं भँवर जिम तो नयनाहाँ । नील बिषायँध सब तो पाहाँ ॥ मच्छ कच्छ दादुर तोहिं आंसा । बकें औ पंख बसहिं तोहिं पासा ॥ जे जे पंख बास तोहिं लये । पानी महँ सो बिषायँध भये ॥ जो उजियार चांद होय उई । बदनैं कलंक डोम लै छुई ॥ औ मोहिं तोहिं निशिँ दिनकर बीचू । राहुके हाथ चांद की मीचूँ ॥ सहसँ बार जो धोवै कोई । तौहू बिषायँध जाय न धोई ॥ दो० काह कहूं वह पियसों, मोहिं शिर धरेसि अँगार । तेहि के खेल भरोसें, तू जीती मैं हार ॥ तोर अकेल का जीत्यौं हारू । मैं जीता जग केर शँगारू ॥ बदन जित्यों जो शशि उजियारी । बेनी जित्यों भुवंगिनिकारी ॥ औ मैं जीते मृग के नैना । कण्ठ जित्यों कोकिल के बैना ॥ भौंह जित्यों अर्जुन धनुकारी । ग्रीवैं जित्यों तमचोर पुछारी ॥ नासिका जित्यों पुहुप तिल सुवा । शूकै जित्यों बेसर होय उवा ॥
[Footnotes] १ खुश १ अँधियारी २ भोरे ३ दिल ४ हरे कमलगट्टा का हार पहिने से क्या नुक़सान ५ दिन ६ रात ७-१४ गूलर ८ सूर्य्य ६ हिलाने से पानी मैला होता १० मेढक ११ बगुला १२ चांद में सियाही १३ मौत १५ हज़ार १६ चांद १७ नागिन १८ गर्दन १६ मुर्ग-मोर २० नाक २१ फूल २२ नाम नक्षत्र २३ ॥