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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 215

२१४ पद्मावत । दोंमिनिजित्यों दशन चमकाहीं। अधरै रंगरविजीत्यो साहीं ॥ केहरें जित्यों लंकै मैं लीन्हीं । जित्यों मराल चालवैदीन्हीं ॥ दो० पुहुप बासमलयाँगिरि, निरमल अंग बसाय । नागिनमआशालुबुध, मारसिकेहरकोजाय ॥ का तोहिं गैर्ब शृँगार पराये । अवहीं लेह लौट सब ठाये ॥ हौं सांवर सलोन मोर नैना । श्वेतैं चीरमुखचातकै बैना ॥ नासिक स्वर्ग फूल ध्रुवतारा। भौंहैं धनुष गगनै काहारा ॥ हीरादशनै श्वेतैं अरु श्यामा । छिपै बीजैं जो विहँसैरामा ॥ बिद्रुमै रंग अधरै रसरोंती। जोदामिनि असरे विमहँताती॥ चाल गयंदै गैर्ब अतिभरी। विसालंकै नागेसर करी ॥ साँवर जहाँ लवनसुठ नीकी । का सरबरै तू करेसि जो फीकी ॥ दो० पुहुँप बास हौं पवन अहारी, कमल मोरनिरहेलें । चहों केश धर नाऊँ, तोर मरन मोर खेल ॥ पद्मावत सुनि उतरै नहिंसही । नागमती नागिन जिम कही ॥ वै वह कहि वह वै कहैं कहा । काह कहों तस जाय न कहा ॥ दोउ नवल भर यौवन गार्जें । अप्सर जानु अखारै बाजें ॥ भा बाहुन बाहुन सो जोरा। हियसोहिय कोइ वाग न मोरा॥ कुचैं मों कुच भई सोहैं अनी । नवहिं ननाये टूटहिं तैनी ॥ कुंभस्थल द्वौ गर्जें मैमन्ता । दोनों उपर परे चौदन्ता ॥ बिजुली १ दांत २ होंठ ३ चीता ४ कमर ५ हंस ६ फूल ७ चन्दन ८ आरजू खाविंद के पास जानेकी रखती ६ गरूर १० सफ़ेद ११ पपीहा १२ आसमान १३ दांत १४ सफ़ेद-काला १५ बिजुली १६ मूंगा १७ होंठ १८ लाल १६ बिजुली २० सूर्य २१ हाथी २२ गरूर २३ भँवराकी कमर २४ बराबर २५ फूल हवाके सहारे २६ तरताज़ा २७ बाल २८ जवाब २६ परी इन्द्रलोक ३० छाती ३१ नांफ सामने ३२ अँगियाके बन्द ३३ नाम हाथी मस्त ३४ ॥