पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६ पद्मावत । कंचनबरनं सुआ अतिलोनां । मानोमिला सुहागहि सोना ॥ दो० रहहिं एक सँग दोऊ, पढ़ें शास्त्र औ वेद । पढ़ना शीशँ डुलावहीं, सुनत लाग तस भेद ॥ भई अनन्त पद्मावति बारी । रचिरचि विधि सबकला सँवारी॥ जगँ बेधा तेहि अंगसुवासा । भँवर आय लुब्धे चहुँपासा ॥ बेनी नाग मलयगिरि पीठी । शशि माथे होय दूजपैठी ॥ भौहैं धनुष साधि शर फेरे । नयनें कुरंग भूल जनुहेरे ॥ नासिकँ कीर कमेलमुखसोहा । पद्मिनिरूपदेखिजगे मोहा ॥ माणिक अधरैं दर्शन जनु हीरा । हियहुलसै कुच कनकँ जँभीरा ॥ केहरि लंकै गवनु गजँ हरी । सुरनर देखि माथ भुइँधरी ॥ दो० जगँ कोउदृष्टि न आवै, अपसरनै होय अकास । योगी यती संन्यासी, तप साधहिं तेहि आश ॥ राजैं सुना दृष्टि भइआना । बुद्धि जो देसँग सुआँ सयाना ॥ भयो रजायँसु मारहिं सुऔं । सबरे सुना चाँद जहँ उआ ॥ शत्रु सुऔं के नाऊ बारी । सुनि धाये जस धाय मँजारी ॥ तब लग रानी सुऔं छिपावा । जवलग आवमँजारि नपावा ॥ पिताँ कि आयसु माथे मोरे । कहोजाय बिनवैं करंजोरे ॥ पंखन कोई होय सुजानू । जाने भुक्ति कि जानि उड़ानू ॥ सुऔं जो पढ़े पढ़ाये बयनौँ । तेहि कतवध जेहिहिये ननयनौँ ॥ सोनेका रंग १ खूबसूरत २ शिर ३ ब्रह्मा ४ दुनिया ५-२४ गूंजना ६ चोटी ७ चन्दन ८ चाँद ६ तीर १० आँख ११-४६ हरिण १२ नाक १३ तोता १४-२६- २१-३३-३५-४३ संसार १५ मूंगा १६ होंठ १७ दाँत १८ खुशहोनो १६ छाती २० सोना २१ चीताकी कमर २२ चालहाथी और सिंह की तरह २३ निगाह २५-२७ इन्द्रलोककी परी २६ अक़्ल २८ हुक्म ३०-३८ दुश्मन ३२ बिल्ली ३४-३६ बाप ३७ अरज़ करना ३६ हाथ जोड़ना ४० अक़्लमन्द ४१ खाना ४२ बोली ४४ मारना ४५ ॥