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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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पृष्ठ 289

२८८ पद्मावत । रानी धर्म सारे पुनि साजा । बन्द मोष जेहिं पावहिं राजा ॥ जहँ तक परदेशी चलिआवा । अन्नदान औ पानि पियावा ॥ योगी यती आव जित कंथी । पूछी पियाजान कोउ पंथी ॥ दान जो देत बांह भइ ऊँची । जायशाहपहँ बात जो पहुँची ॥ पातुरिकहुतयोग सु आंगी । शाहैं उघारे हत वह मांगी ॥ योगिनवेष वियोगिन कीन्हीं । सुनके शब्द मोलततकीन्हीं ॥ पद्मिनिपहँ पठईकर योगिन । वेगँआनकरविरहवियोगिन ॥ दो० चित्र कला मन रोहन, परकाया परवेश । आयचढ़ी चितौरगढ़, होययोगिनकरभेष ॥ खण्ड चालीसवां वेश्यागमन ॥ मांगत राज वार चल आई । फेर चेरी यह बात जनाई ॥ योगिन एक वारे है कोई । मांगै जैसि वियोगिनि होई ॥ अवहीं नवयौवन तपलीन्हीं । फार पटोरीं कन्थौ कीन्हीं ॥ विरह विभूत जटा वैरागी । छाला कांध जांप कँठलागी ॥ मुद्रैं श्रवणैं नहीं थिरै जीउ । तन त्रिशूल आधारी पीउ ॥ छाता छाँह धूप जनु मरै । पांयन पँवरी सुभुल जरै ॥ भैंरी शब्द धँधारी करा । जरै सो ठाँउ जहाँ पैंग धरा ॥ दो० किंगरी गहे वियोग बजावे, वारहि वारै सुनाउ । नयनचक्रचहुँदिशि निरखि, धौंदरशनकबपाउ ॥ खैरातखाना १ बेषवाले २ मुसाफिर ३ मकार ४ शाह ने बुलाया ५ पद्मावत को ले. व इनाम पावेगी ६ जल्द ७ तजबीह ८ दरवाजा ९-११-२४ दासी १० दुखी १२ नवजवान १३ सारी १४ गुदड़ी १५ माला १६ बाला १७ कान १८ क़ायम १६ खड़ाऊँ २० शृंगी बजा की तरह आवाज मस्ताना २१ जगह २२ पैर २३ तरफ २५ देखना २६ ॥

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