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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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˙पद्मावत˙ 14653 ३१३ नागमती यह दुनियां धन्धा । बांचा सोई न यह चित बन्धा ॥ राघव दूत सोई शैतानू । माया अलाउदीं सुलतानू ॥ प्रेम कंथा यह भांति विचारू । बूझलेहु जो बूझेंहि पारू ॥ दो० तुरकी अरबी हिन्दवी, भाषाँ जेती आहि । जामें मारग प्रेमका, सबै सराहें ताहि ॥ मुहम्मद कवि यह जोर सुनावा । सुना सो प्रेम पीर का पावा ॥ जोरे लायै रक्त लेगये । प्रेमप्रीति नयनहिं जल भये ॥ औ मैं जान गीत अस कीन्हा । कीय हरीति जगत मँह चीन्हा ॥ कहां सो रतनसेन अब राजा । कहां सुवा अस बुधै उपराजा ॥ कहां अलाउदीन सुलतानू । कहँ राघव जेहि कीन्ह बखानू ॥ कहँ स्वरूप पद्मावत रानी । कुछ न रही जग रही कहानी ॥ धनसोई यशँ कीरति तासू । फूल मरै पै मरै न बासू ॥ दो० कैन जगत यशँ बेचा, कैन लीन यशँ मोल । जो यह पढ़ै कहानी, हम सँवरै दोइ बोलें ॥ मुहम्मद वृद्धैं बैश जो भई । यौवनैं हत सो अवस्थौ गई ॥ बल जो गयो कैक्षीऐं शरीरू । दृष्टि १६ गई नयनहिं दै नीरू ॥ दर्शनै गये कै बचा कपोलौँ । बैनैं गये अनरुच दैबोला ॥ बुधि २१ जोगई दै हियैँ बौराई । गर्व २२ गयो तरिहत शिरनाई ॥ श्रवणैं गये ऊँच जो सुना । स्याही गये शीशँ भा धुना ॥ भँवर गये केशँहि दे भुवा । यौवनैं गयो जीत लै जुवा ॥ बूझसको १ बोली २ खून जिगर पीकर ३ दुनियां में निशानी ४ अक्ल बताई ५ तारीफ ६ नेकनामी ७-६-१० करनी ८ दुआयखैर ११ बूढ़ी उमर १२ जवानी १३-२७ उमर १४ दुबला बदन १५ निगाह १६ पानी १७ दांत १८ गाल १६ आवाज़ २० अक्ल २१ दिल २२ ग़रूर २३ कान २४ शिर २५ बाल २६ ॥