पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८ पद्मावत । उठहिं तुरंग लेहिं नहिं बागा । जानौँ उलट गगन कहँ लागा ॥ पवन झकोरें देहिं हिलोरा । स्वर्ग लाय भुइँ लाइ बहोरा ॥ जंग डोलै डोलत नयनोंहाँ । उलट औझर चहै पलमाहां ॥ जबहिं फिराये कङ्कन चूरा । असवै भौंह भँवरकी जोरा ॥ समुद्र हिलोर करहिं जनु झूले । खंजन लरहिं मिरगँ वन भूले ॥ दो० भरे समुद्र अस नयन दुइ, माणिक भरे तरंग । आवहिं तीर जाहिं फिर, काल भँवर तेहि सग ॥ ४७ ॥ बरुनी का बरनौं इमै वनी । साधे बान जानु वहि अनी ॥ जुरी राम रावणकी सैना । बीच समुद्र भयें वह नयना ॥ वारहि पार न्यावर सांधे । जासों हेरें लाग विये वांधे ॥ उन्ह बानहिं अस कौन न मारा । वैध रहा सगरा संसारा ॥ गगन नखत जस जाहिं न गिने । वै सब बान वही के हने ॥ धरती बान बेध सब राखे । शाखा ठाढ़ वही सब शाखे ॥ रोवँ रोवँ मानुष तन ठाढ़े । सूतहिं सूत बेध अस गाढ़े ॥ दो० वरुनि बान जस उपनहिं, वेधी रन वन ढंख । सो जेहि तन सब रोवां, पंखहि तन सब पंख ॥ नासकेँ खंग देवों केहि योगू । खंग खीन वह बदन सँयोगू ॥ नासकेँ देखिल जान्यो सुआ । शुक आय बेसर होय उआ ॥ सुआ जो पियर हीरामन लाजा । और भाव का वरनौं राजा ॥ सुआ सुनाक कठौर नवौरी । वह कोमलैं तिलपुहुँपै सँवारी ॥ घोड़ा १ आसमान २-३-१८ दुनियां ४ आँख ५-८ ममोली ६ हिरन ७ जवाहर ६ लहरि १० किनारा ११ पलक १२-२० तारीफ़ १३ इसतरह १४ फ़ौज १५-१६ देखना १७ सूराख १६ जानवर परिन्द २१ नाक २२-२७ तलवार २३-२५ बराबरी २४ पतली २६ नाम नखत २८ वयान करना २६ सख्त ३० टेढ़ी ३१ मुलायम ३२ फूल ३३ ॥