भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 54

पद्मावत । ५३ आय दोहों नारंग बिच भये । देखि मयूर ठमक रहिगये ॥ आय जुरी भँवरन की पांती । चन्दन गाभ वास की माती ॥ गइ कालिन्दी बिरह सताई । चलपराग अरबैल बिचआई ॥ नाभी कुंड सो वानारसी । साँहें को होय मीचें तेहिलिखी ॥ दो० शिरकरवँततनकाशी लैले, बहुतसीफ तेहिआश । (१५४) बहुत धूम घूँट मैं देखी, उत्तर न देइ निराश ॥ चोंटी पीट लन्हि वै पाछें । जनु पहिर चली अप्सरा काँछें ॥ मलैयागिरि की पीठि सँवारे । बेनी नाग चढ़ा जनु कारे ॥ लहरैं देत पीठ जनु चढ़ा । चीर उढ़ावा केंचुल मढ़ा ॥ वेहिकाकहँ अस बेनी कीन्ही । चन्दनवास भुअंगहि लीन्ही ॥ कृष्णकरा चढ़ा वह माथे । तब सो लूटि अब छूटन नाथे ॥ कारे कमल गहे मुख देखा । शशि पीछे जनु राहुबिशेखा ॥ को देखै पावै वह नागु । सो देखै माथे मन भागू ॥ दो० पन्नग जो पंकज मुखगहे, खंजन तेहिशिर बैठ । (१५५) छत्र सिंहासन राजधन, ताकहँ होइ जो दीठ ॥ लंक खीन असआहिनकाहू । केहरि कहूँन वह सरताहू ॥ बसा लंक पखनीगजभीनी । तेहितेँ अधिक लंक वहखीनी ॥ परहँस पिवर भये तहँ बसौ । लिये डंख मानुष कहँ डसां ॥ मानहुँ नलिन खंड दुइ भये । दुहँबिच लंक तार रहिगये ॥ हिये सोमूड़परचलीवहनागा। पैगदेत कितसहसैकै लागा ॥ यमुना १ नाममुक़ाम २ बराबर ३ मौत ४ धुआं ५ जवाब ६ ना- उम्मेद ७ इन्द्रपरी ८ धोती ६ चन्दन १० चोटी ११-१२ काला नाग १३- १४ पकड़ना १५-१६ चांद १६ सांप १७ कमल १८ ममोला २० कमर २१- २५-२८-३३ पतली २२ चीता २३ भंवरा २४-३१ बहुत पतली २६ बहुत २७ बारीक २६ डाह ३० कोकावेली ३२ छाती ३४ डर ३५ ॥