भारतकोश
पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

DevanagariAwadhipublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 318 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 55

छुद्रघंट मोहहिं नरराजा । इन्द्र अखाड़ आये जनु बाजा ॥ नाम बीन गैहे कामिनी । लाकहिं सबै राग रागिनी ॥ दो० सिंहैं नजीता लंकैं शर, हार लीन्ह बनवास । तेहि रिस रक्तपिये मानुष, खाय मारके मांस ॥११५॥ नाभी कुण्डसो मलयसमीरू । समुद्र भँवर जस भवै गंभीरू ॥ बहुते भँवर बौंडर भये । पहुँच न सके स्वर्ग कहँ गये ॥ चन्दनमांझ कुरंगिन खोजू । वेहिंको पाव को राजा भोजू ॥ को वह लागहि वंचल सींझा । काकहिं लिखी ऐसको रीझा ॥ सोहै कमल सुगन्ध शरीरू । समुद्र लहर सोहै तन चीरू ॥ झूलहि रतन पाटके झोपां । साज मदन वहिकाकहँ कोपा ॥ अबहिं सो अहै कमलकी करी । नजनों कौन भँवर कहँ धरी ॥ दो० बेधरही जग बासना, निरमलै मेदै सुगन्ध ।११६। तेहि अरघान भँवर सब लुब्धे, तजेंहिं न दियेबन्ध ॥ बैरणों तम्बै लंकै की शोभा । औ गर्जे गवनदेख सबलोभा॥ जुरे जंघ शोभा अति पाये । केला खंभ फेर जनु लाये ॥ कमल चरण अतिरौंत विशेखी । रहै पांट पर भूमि नदेखी ॥ देवता हाथ हाथ पगलेहीं । जहँ पगपरै शीशँ तहँ देहीं ॥ माथे भागन कोउ अस पावा । चरणकमल लै शीशँ चढ़ावा॥ चौरा चांद सूर्य उजियारा । पायल बीच करहिं झनकारा॥ अनवट बिछिया नखत तँराई । पहुँच सकै को पांइन ताई ॥

करधनी १ नामबाजा २ पकड़ेहुये ३ चीता ४ कमर ५ चन्दनकी हवा ६ गंहिरा ७ आसमान ८ हरिनके पांवका निशान ९ लहँगा १० कामदेव ११ पांकसांझ १२ केसर १३ छोड़ना १४ तारीफ़ करना १५ चूतड़ १६ कमर १७ हाथी १८ बहुत लाल १६ तख़्त २० ज़मीन २१ क़दम २२ शिर २३-२४ छोटे नखत २५ ॥