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पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)

Padmavat with Hindi Commentary

मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा

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७२ पद्मावत । जेहिसोबिरहतेहिआगनदीठी १ । सौहिं २ जरैफिरदेहि न पीठी ॥ जगँमहँ कठिनें खड्ग की धारा । तेहिते अधिकँ बिरहकी झारा ॥ अगमें पंथ जो ऐस न होई । साधु कहै पावै सब कोई ॥ तेहि समुद्र महँ राजा परा । जरा चहै पै रोवैं न जरा ॥ दो० तलफैतेल कराह जिमि ८; इमि ९ तलफै सबनीरे १० । वहि जो मलयगिरि ११ प्रेमका, सुबुन्दसमुद्र शरीर ॥ सुरौ समुद्र पुनि राजा आवा । महुवामँधु छाती देखरावा ॥ जो तेहि पिये सो भांवर लेय । शीशैं फिरै पंथ पैगैं न देय ॥ प्रेमसुरौ जेहिके जिय माहां । कितै बैठे महुवा की छाहां ॥ गुड़ की पास दाखें रस रसा । बेरी २० वेर मार मन गसाँ ॥ बिरहिन दग्धैकीन्ह तन भौंठे । हाड़ जराय दीन्ह जस काठे ॥ नयनैं नीर २६ सों पोतै क्यौँ । तस मँधु चुवै बरै जस दिया ॥ बिरह सुरँगें भूँजै माँसू । गिर गिर पड़ैं रँक्त के आँसू ॥ दो० मुहम्मद जो प्रेमका, हिये ३१ दीप तेहि याख । शीशैं न देइपतंग ज्यों, तबलंग चाखन वाख ॥ पुनिकिलकिला समुद्रमहँ आई । गा धीरज देखत डर खाई ॥ भा किलकिल अस उठै हिलोरा । जनुअकाश टूटै चहुँ ओरा ॥ उठै लहर परबत की नाई । फिर आवै योजन लखताई ॥ धर्तीलेत स्वर्ग लहि बाढ़ा । सकलै समुद्र जानो भाठाढ़ा ॥ नीरे ३७ होय तरि ऊपर सोई । मँह अरम्भ समुद्रमहँ होई ॥ १ देखना १ सामने २ दुनियां ३ मुश्किल ४ तलवार ५ ज्यादा ६ जहां कोई न पहुँचसकै ७ राह ८-१६ जिसतरह ९ इसतरह १० पानी ११ चन्दन १२ शराब १३-१४-१८-२८ शिर १५ क़दम १७ क्योंकर १६ अंगूर २० बेर नाम मेवा फ़सली २१ लेना २२ गर्म २३ भट्टी २४ आंख २५ आंसू २६ बदन २७ सीख २६ खून ३० दिल ३१-३२ पांखी ३३ नामसमुद्र ३४ आसमान ३५ सूर्य ३६ पानी ३७ शेर ३८ ॥