पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
पृष्ठ 76, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ेंपद्मावत । ७५ खण्ड तेरहवां सातसमुद्रपार भाव सिंहलदीपखण्ड ॥ पूँछा राजैं कहु गुर सुवा । नजनों आज कहां दिन उवा ॥ पवनैं बास शीतलैं लै आवा । क्या दहतेँ चंदन जनुलावा ॥ कबहुँन ऐसोजुड़ान शरीँरू। पड़ा अगिनमहँ जानहु नीरू ॥ निकसत आव किरन रबि रेखा । तिमिरँ गई निरमलं जगँ देखा उठे मेघ जस जानहु आगे । चमकै बीजै गगनैं परलागे ॥ तेहिऊपर जनु शशि परकासौँ। औसगत्रीवहँ भयोनिरासा और नखतचहुँदिशँ उनियारी । ठावहिंठांवैँ दीप असबारी ॥ दो० और दखिनदिश नेरे, कंचन मेरुँ दिखाउ । जैसे बसंतऋतु आवे, तैसिबास जगँ आउ ॥ तुइँ राजा जस विक्रमँ आदी । तुइँ हरिचंद बैनैँ सतबॉदी ॥ गोपिचंदैँ तुइँ जीता योगा । औ भरथैरीन पूज बियोगौँ ॥ गोरखँ सिद्ध दीन्ह तुहि हाथू । तारी गुरु मछन्दरै नाथू ॥ जीति प्रेम तुइँ भूमिँ अकांशू । दृष्टि परा सिंहल कैलाशू ॥ वै जो मेघ गढ़ेँ लाग अकासा । बजैरी कटी कोटेँ बहुँपासा ॥ और नखत वेहिके चहुँपासा । सेब रानिन की अहैं उड़ासौँ ॥ तेहिपरशशि जोगग्रहत्रहिं भरा राजमंदिर सोने नगजरा ॥ दो० गगनैं सरोवर सहस कमल, कुमुँद तराइँ पास । हवा १ ठंढी २ बदन ३-५ जलना ४ पानी ६ सूर्य ७ अँधियारा ८ पाक साफ़ ६ दुनियां १०-२० बिजुली ११ आसमान १२-३७ चांद १३-३५ रोशनी १४ छोटे नखत १५-३६ चारों तरफ १६ हरजगह १७ सोना १८ नाम पहाड़ १६ राजाविक्रमाजीत २१ नाम राजा २२-२४-२५ सच बोलनेवाला २३ दुखी २६ नाम योगी २७-२८ ज़मीन २६ निगाह ३० क़िला ३१-३३ बुर्ज ३२ महल ३४ तालाव ३८ हज़ार ३६ कोकावेली ४० नखत ४१ ॥