पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी - सटीक ऐतिहासिक महाकाव्य)
Padmavat with Hindi Commentary
मलिक मोहम्मद जायसी / पं. रामचन्द्र शुक्ल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७४ पद्मावत । दो० कान्हेँ समुद्गधस लीन्हेँसि, भा पीछे सब कोय । कोई काहू न सँभारे, आपन आपन होय ॥ कोई बोहितैं जस पवनैं उड़ाहीं । कोई चमकबीजैं परजाहीं ॥ कोई भल जस धाव तुषारूँ । कोई जैस बैल गरियारूँ ॥ कोई हरूँ जानि रथ हांका । कोई गरु पहाड़भा थाका ॥ कोई रेंगहिं जानहु चांटी । कोई टूटि होहिं सर माटी ॥ कोई खाय पवनैं कर झोला । कोई गिरहिं पात ज्यों डोला ॥ कोई परहिं भँवर जल माहीं । फिरत रहहिं कोई दियेन बाहीं ॥ राजा कर भा अगमनैं खेवा । खेवकै आगे सुवा परेवा ॥ दो० कोई दिन मिला सबेरैं, कोई आवा पछरात । जाकर हुत जस साजूँ, सो उतरा तेहिभांत ॥ सतैं समुद्र मानसरेँ आये । सत जो कीन्ह सहेंसैं सिधिपाये ॥ देखि मानसरेँ रूप सुहावा । हियेँ हुलासैं पुरइनैं होयछावा ॥ गा अँधियार रयनैं मसि छूटी । भा भिनसार किरनरवि फूटी ॥ अस्त अस्तैं सबसाथी बोले । अन्ध जो अहे नयनैं विधि खोले ॥ कमल बिकलैं तसबिहँसीं देहीं । भँवर दरश होयहोयरसलेहीं ॥ हँसहिं हंस औ करहिं कुरेरौं । चुनहिं रतनैं मुक्ताहलँ हेरा ॥ जो अस आवसाधि तपयोगू । पूजी आस मानरस भोगू ॥ दो० भँवर जो मूँसौं मानसरेँ, लीन्ह कमलरस आय । घुनजो हियावैं न कैसका, झूर काठ तस खाय ॥ श्रीकृष्णचन्द्रजी १ नांव २ हवा ३-६ बिजुली ४ घोड़ा ५ भारी ६ हलकी ७ चूंटी ८ आगे १० मल्लाह ११ सामान १२ नाम तालाव जिसमें हंस रहते हैं १३-१५ हज़ारतरह की आराम १४ दिल १६ खुश १७ कमल १८ रात १६ सियाही २० सूर्य २१ घाहवाह २२ आंख २३ ईश्वर २४ खिलना २५- २६ कुलेलकरना २७ जवाहर जिसकी पैदाइश खानिसे होती है २८ मोती २६ हिम्मत बांधना ३० नामतालाव ३१ दिलेरी करना ३२ ॥