भारतकोश
पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)

Panchadashi by Swami Vidyaranya

स्वामी विद्यारण्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished726 पृष्ठ

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पृष्ठ 397

ध्यानदीपप्रकरणम् ३७५ अनुष्ठानप्रकारोऽस्याः पञ्चीकरण ईरितः । ज्ञानसाधनमेतच्चेनेति केनात्र वारितम् ॥६४॥ इस निर्गुणोपासना को कैसे करें ? यह बात श्रीमच्छंकरा- चार्य के 'पंचीकरण' नाम के ग्रन्थ में कही है। यदि कहो कि यह उपासना मुक्ति का साधन नहीं है, यह तो ज्ञान का ही साधन है । तो हम कहेंगे कि हम इस बात का निषेध नहीं करते । यह तो हमें स्वीकार ही है। नानुतिष्ठति कोप्येतदिति चेन्मानुतिष्ठतु । पुरुषस्यापराधेन किमुपास्तिः प्रदुष्यति ॥६५॥ यदि कहो कि सगुणोपासना करने वाले तो बहुत से पाये जाते हैं, निर्गुणोपासना तो कोई भी करता नहीं दीखता । तो हम कहेंगे कि—भले ही कोई निर्गुणोपासना न करो, यह तो करनेवाले पुरुषों की कमी है। पुरुष की कमी से उपासना का क्या बिगड़ता है ? इतोऽप्यतिशयं मत्वा मन्त्रान् वश्यादिकारिणः । मूढा जपन्तु तेभ्योऽतिमूढाः कृषिमुपासताम् ॥६६॥ सगुणोपासना से भी सुकर देखकर मूढ लोग वशीकरण आदि मन्त्रों का जप करें, उनसे भी मूर्ख लोग खेती करलें तो भी मुमुक्षु लोग निर्गुणोपासना को कैसे छोड़ देंगे ? सगुणोपासना का फल भी बहुत दिनों बाद मिलता है। इस कारण ऐहिकफल देने की अधिकता को देखकर, मूढ लोग वशीकरणादि मन्त्रों का जप करें। परन्तु उन्हें देखकर विवेकी लोग सगुणोपासना को छोड़ नहीं देते हैं। अथवा उनसे भी अतिमूर्ख लोग, किसी भी नियम में न बँधने की स्वतन्त्रता