पञ्चदशी (हिन्दी व्याख्या सहित)
Panchadashi by Swami Vidyaranya
स्वामी विद्यारण्य द्वारा
स्रोत: चौखम्बा विद्याभवन · चौखम्बा विद्याभवन · 1940 (उद्गम)
पृष्ठ 532, कुल 726 में से
संदर्भ में पढ़ें५१० पञ्चदशी बालस्य हि विनोदाय धात्री वक्ति शुभां कथाम् । क्वचित् सन्ति महाबाहो राजपुत्रास्त्रयः शुभाः ॥२२॥ द्वौ न जातौ तथैकस्तु गर्भ एव न च स्थितः । वसन्ति ते धर्मयुक्ता अत्यन्तासति पत्तने ॥२३॥ स्वकीयाच्छून्यनगरान्निर्गत्य विमलाशायाः । गच्छन्तो गगने वृक्षान् ददृशुः फलशालिनः ॥२४॥ भविष्यन्नगरे तत्र राजपुत्रास्त्रयोऽपि ते । सुखमद्य स्थिताः पुत्र ! मृगयाव्यवहारिणः ॥२५॥ धात्र्येति कथिता राम ! बालकाख्यायिका शुभा । निश्चयं स ययौ बालो निर्विचारणया धिया ॥२६॥ बालकों को बहलाने के लिए धायी एक बड़ी मनोहर कहानी कहा करती हैं कि—किसी देश में तीन बड़े सुन्दर राजकुमार रहते हैं । उनमें से दो तो अभी तक उत्पन्न ही नहीं हुए हैं। और एक तो अभी तक गर्भ में ही नहीं आया है। वे तीनों के तीनों बड़े धर्मपूर्वक एक अत्यन्त असत् नगर में रहते हैं । एक बार वे तीनों उदार राजकुमार अपने शून्य नगर में से निकल कर जा रहे थे कि उन्होंने आकाश में फलों से लड़े हुए बहुत से पेड़ देखे । वे तीनों गजपुत्र भविष्यत् नगर में शिकार खेलते खेलते आज आनन्द पूर्वक रह रहे हैं ।. हे राम ! धायी ने ये एक बड़ी मनोहर कहानी कही थी। वह भोला बच्चा अपनी विचारशून्य [भोली] बुद्धि से इसे ठीक मान बैठा । इयं संसाररचना विचारोज्झितचेतसाम् । बालकाख्यायिकेवेत्थमवस्थितिमुपागता ॥२७॥