पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 110, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें९८ पाराशरस्मृतिः [ नवमो- कूपखात, तटाखात, दीर्घखात और घर्मखात-इन गड्डों में गिरकर मृत्यु को प्राप्त होने पर कोई प्रायश्चित्त नहीं करना पड़ता ॥४०॥ वेश्मद्वारे निवासेषु यो नरः खातमिच्छति । स्वकार्यगृहखातेषु प्रायश्चित्तं विनिर्दिशेत् ॥४१॥ घर के दरवाजे पर, गोशाला में अथवा गृहनिर्माण के लिए किये गये गड्ढे में गिरकर पशु के मरने पर प्रायश्चित्त करना पड़ता है ॥४१॥ निशि बन्धनिरुद्धेषु सर्पव्याघ्रहतेषु च । अग्नि-विद्युद्विपन्नानां प्रायश्चित्तं न विद्यते ॥४२॥ रात में रोकने या बाँधने से, सर्प या सिंह आदि हिंसक जन्तुओं के द्वारा मारे जाने पर, अग्निकाण्ड होने अथवा बिजली गिरने से मृत पशुओं के निमित्त किसी प्रायश्चित्त का विधान नहीं है ॥४२॥ ग्रामघाते शरौघेण वेश्मभाङ्गनिपातने । अतिवृष्टिहतानां च प्रायश्चित्तं न विद्यते ॥४३॥ शत्रु द्वारा ग्राम के घेरने, शत्रु द्वारा चलाये हुए बाणों से बिंधने, मकान के ध्वस्त होने अथवा मूसलधार वृष्टि के कारण पशुमरण होने पर प्रायश्चित्त नहीं किया जाता है ॥४३॥ संग्रामे प्रहतानां च ये दग्धा वेश्मकेषु च । दावाग्नि ग्रामघातेषु प्रायश्चित्तं न विद्यते ॥४४॥ युद्धस्थल में, दावानल की लपेट में आये हुए, घर में जलने और सम्पूर्ण गांव के विध्वंस होने पर मृत गाय के लिए कोई प्रायश्चित्त नहीं किया जाना चाहिए ॥४४॥ यन्त्रिता गौश्चिकित्सार्थं मूढगर्भविमोचने । यत्ने कृते विपद्येत प्रायश्चित्तं न विद्यते ॥४५॥ १. '-ऽपहृताना' इति पा० ।