पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 118, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ें[शीर्षक] १०६ पाराशरस्मृतिः [ दशमो-
गधी और सूअर के साथ गमन करने से प्राजापत्य व्रत करना चाहिए। गाय के साथ रमण करने से तीन दिन-रात निरन्तर उपवास करके दक्षिणा में ब्राह्मण को एक गाय देनी चाहिये ॥ १६ ॥ महिष्युष्ट्री-खरीगामी त्वहोरात्रेण शुद्ध्यति । १अमरे समरे वाऽपि दुर्भिक्षे वा जनक्षये ॥१७॥ भैंस, ऊँटनी और गधी के साथ एक बार गमन करने से एक दिन तक उपवास करके वह व्यक्ति शुद्धता पा लेता है। डकैती, युद्ध, अकाल, महामारी, ॥ १७ ॥ वन्दिग्राहे भयार्तो वा सदा स्वस्त्रीं निरीक्षयेत् । चाण्डालैः सह सम्पर्कं या नारी कुरुते ततः ॥१८॥ बलपूर्वक दासीकरण करना, राजा और चोर के डर से सदैव अपनी पत्नी की रक्षा करते रहना। चाण्डालों के साथ रमण करनेवाली स्त्री को चाहिए कि, ॥ १८ ॥ विप्रान् दश वरान् कृत्वा स्वकं दोषं प्रकाशयेत् । आकण्ठसम्मिते कूपे गोमयोदककर्दमे ॥१९॥ वह दश कुलीन ब्राह्मणों के समक्ष अपने किये हुए दोषों को स्वीकार कर ले और किसी कूप या गड्ढे के जल में कण्ठ तक गोबर का कीचड़ बनाकर ॥ १९ ॥ तत्र स्थित्वा निराहारा त्वहोरात्रेण निष्क्रमेत् । स-शिखं वपनं कृत्वा भुञ्जीयाद्यावकौदनम् ॥२०॥ उसमें दिन-रात निराहार रहकर खड़ी रहे। तत्पश्चात् दूसरे दिन उस गढ़े से बाहर आकर समूचे सिर का मुण्डन करा डाले और यव का भात बनाकर भोजन करे ॥ २० ॥ त्रिरात्रमुपवासित्वा त्वेकरात्रं जले वसेत् ।
[पाद-टिप्पणी] १. 'डामरे' इत्यपि पाठः ।