भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

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CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri विषयानुक्रमणिका विषय पृष्ठांक १. प्रथम अध्याय | आदि की शुद्धि, रजस्वला-स्पर्श से धर्म के सूक्ष्म रूपों का निरूपण, | प्राप्त होनेवाले अशौच की निवृत्ति । ६८-७८ ब्राह्मणोंके लिए षट्कर्म, युग-धर्म, | ८. अष्टम अध्याय आतिथ्यकर्म-द्वारा होनेवाली फल- | गोहत्याके पाप का प्रायश्चित्त तथा प्राप्ति का कथन । १-१९ | प्राजापत्य व्रत का विधान । ७८-८९ २. द्वितीय अध्याय | ९. नवम अध्याय गार्हस्थ्य धर्म का विवेचन तथा | जाने या अनजाने में गाय-बैल कृषक द्वारा अनजान में हुए पापों | आदि पशुओं का मरण होने पर के निराकरण का साधन । १९-२४ | उसके प्रायश्चित्त का निर्देशन ३. तृतीय अध्याय | तथा कृच्छ्र चान्द्रायण व्रत का जननाशौच तथा मरणाशौच का | निरूपण । ८९-१०२ वर्णन, सगोत्रीकी शुद्धि का विधान, | १०. दशम अध्याय प्रसूताकी शुद्धिका कथन तथा वीर | चान्द्रायण तथा कृच्छ्र सान्तपन पुरुषों की गति का विवेचन । २४-३६ | व्रत की विधि, अगम्या स्त्री से ४. चतुर्थ अध्याय | समागम एवं पशुमैथुनका प्रायश्चित्त आत्महत्या का प्रायश्चित्त, तप्त- | तथा चारों वर्णों का शुद्धी- कृच्छ्र नामक व्रत का विधान तथा | करण । १०३-१११ स्त्रियों के लिए पातिव्रत्य धर्म का | ११. एकादश अध्याय पालन । ३६-४४ | किसी अभोज्य पदार्थ के भक्षण की ५. पञ्चम अध्याय | शुद्धि, विजातीय वर्णों से उत्पन्न भेड़िये, कुत्ते आदि जानवरों के | होनेवाली सन्तान की संज्ञा, ब्राह्मण काटने पर शुद्धीकरण का विधान, | के लिए शूद्रान्न ग्रहण की विधि अग्निहोत्री के मरण में दाह-कर्म | तथा प्रायश्चित्त का विधान, की क्रिया । ४५-५० | कृच्छ्र, अतिकृच्छ्र आदि व्रतों का ६. षष्ठ अध्याय | उल्लेख । ११२-१२४ जीवहिंसा में प्रायश्चित्त-कर्म का | १२. द्वादश अध्याय विधान, चाण्डाल-संसर्ग से उत्पन्न | अज्ञाततावश मल-मूत्रादि के भक्षण- दोषोंका निराकरण, कृमि दोषका | पान के दोष का निवारण, आत्म- शुद्धीकरण तथा दूषित अन्न की | हत्या के असफल प्रयास की शुद्धि, शुद्धि का निरूपण । ५०-६८ | विविध प्रकार के स्नानादि का ७. सप्तम अध्याय | माहात्म्य तथा ब्रह्महत्यादि पापों विविध प्रकार के द्रव्यों, पात्रों | का प्रायश्चित्त । १२४-१४० Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal