भारतकोश
पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)

Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation

महर्षि पराशर द्वारा

स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished170 पृष्ठ

पृष्ठ 149, कुल 170 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 149

CC-0. In Public Domain. Digitization by eGangotri

[ऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता १३७

समुद्रसेतुगमनं प्रायश्चित्तं विनिर्दिशेत् । सेतुबन्धपथे भिक्षां चातुर्वर्ण्यात् समाचरेत् ॥६३॥ को विप्रघाती के लिए सेतुबन्ध रामेश्वर दर्शन करने का प्रायश्चित्त बतलाना चाहिए। प्रायश्चित्त करनेवाले ब्रह्मघाती को रामेश्वर दर्शन के लिए जाते समय मार्ग में सभी वर्णों के यहाँ भिक्षाटन करना चाहिए ॥६३॥ वर्जयित्वा विकर्मस्थान् छत्रोपानद्-विवर्जितः । अहं दुष्कृतकर्मा वै महापातककारकः ॥६४॥ विपरीत आचरण करनेवालों के घर भिक्षाटन न करे और न तो अपने पास छाता, जूता आदि ही रखे। भिक्षा याचना के समय प्रायश्चित्त- कर्त्ता को कहना चाहिए—'मैं दुराचरण करनेवाला पापी हूँ' ॥६४॥ गृहद्वारेषु तिष्ठामि भिक्षार्थी ब्रह्मघातकः । गोकुलेषु वसेच्चैव ग्रामेषु नगरेषु वा ॥६५॥ मैं घर के द्वार पर ब्रह्मघाती बनकर भिक्षा के उद्देश्य से आया हूँ। गायों के समूह के साथ गाँव और नगरों में निवास करे ॥६५॥ तपोवनेषु तीर्थेषु नदीप्रस्रवणेषु वा² । एतेषु ख्यापयन्नेनः³ पुण्यं गत्वा तु सागरम् ॥६६॥ तपोवन, तीर्थ, नदी और जल-प्रपातों में अपने किये हुए दुष्कर्मों का वर्णन करते हुए पवित्र सागर में जाय ॥६६॥ दशयोजनविस्तीर्णं शतयोजनमायतम् । रामचन्द्रसमादिष्टं¹ नरसञ्चय-सञ्चितम् ॥६७॥ भगवान् रामचन्द्र के कथनानुसार नल द्वारा निर्मित, दस योजन चौड़े और सौ योजन लम्बे ॥६७॥


१. 'समादिशेत्' । २. 'च' इति । ३. '-न्नेव' ।

Prof. Madhav Prasad Lamichhane Collection, Kathmandu, Nepal