पराशर स्मृति (माधवाचार्य भाष्य व हिन्दी अनुवाद सहित)
Parashara Smriti with Madhavacharya Bhashya & Hindi Translation
महर्षि पराशर द्वारा
स्रोत: ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी · ठाकुरप्रसाद एण्ड संस वाराणसी (उद्गम)
पृष्ठ 67, कुल 170 में से
संदर्भ में पढ़ेंऽध्यायः ] भाषाटीकासहिता ५५ यदि ब्राह्मण ने चोर, श्वपाक अथवा चाण्डाल का वध कर दिया हो तो वह दिन-रात उपवास कर पंचगव्य का प्राशन करे, तब उसकी शुद्धि होती है ॥२१॥ श्वपाकं १वाऽपि चाण्डालं विप्रः सम्भाषते यदि । द्विजसम्भाषणं कुर्यात् सावित्रीं च सकृज्जपेत् ॥२२॥ यदि ब्राह्मण श्वपाक अथवा चाण्डाल से संभाषण करे, तो वह अन्य ब्राह्मण से संभाषण कर एक बार गायत्री का जप करे तब उसकी शुद्धि होती है ॥२२॥ चाण्डालैः सह सुप्ते तु त्रिरात्रमुपवासयेत् । चाण्डालैकपथं गत्वा गायत्रीस्मरणाच्छुचिः ॥२३॥ चाण्डाल के साथ सोनेवाला तीन राततक उपवास करे और उसके साथ रास्ता चलनेवाला गायत्री का स्मरण करे तब उसकी शुद्धि होती है ॥२३॥ चाण्डालदर्शने सद्य आदित्यमवलोकयेत् । चाण्डालस्पर्शने चैव सचैलं स्नानमाचरेत् ॥२४॥ यदि चाण्डाल को देख ले तो सूर्य-दर्शन से शुद्ध हो जाता है, और यदि चाण्डाल का स्पर्श हो ( छू ) जाय तो वस्त्र-सहित स्नान करे तब वह शुद्ध होता है ॥२४॥ चाण्डाल खात वापीषु पीत्वा सलिलमग्रजः । अज्ञानाच्चैकभक्तेन त्वहोरात्रेण शुद्ध्यति ॥२५॥ यदि कोई ब्राह्मण अज्ञान से चाण्डाल के द्वारा निर्माण कराये गये वापी, कूप अथवा तालाब आदि का जल पी ले, या स्नान कर ले तो १. 'चाऽपि' ।