भारतकोश
परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

परिभाषेन्दुशेखर (नागेश भट्ट - व्याकरण परिभाषा सिद्धान्त एवं भैरवी टीका सटीक)

Paribhashendushekhara of Nagesha Bhatta with Commentary

महामहोपाध्याय नागेश भट्ट (सम्पादक: पं. विश्वनाथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished373 पृष्ठ

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? Let's look at: व्या (vya) पा (pa) रै (rai - two matras!) स्त (sta - half sa + ta!) त्रितया (tri-ta-yaa)? Wait! "व्यापारैस्तत्त्रितयारब्ध..."? Let's look at the ligature: र has two slants above: रै! Then half-स + त = स्त! Then त् + त्रि = त्त्रि! Then त - या - र - ब्ध = तया-रब्ध! YES! फलव्यापारैस्तत्त्रितयारब्धसमुदायरूपस्येत्यर्थः! Let's verify: तत्तच्छब्द- (word 1) फल (word 2) व्यापारैः (word 3) -> "तत्तच्छब्द-फल-व्यापारैः तत्-त्रितय-आरब्ध-समुदाय-रूपस्य इत्यर्थः"! "By those three—the respective sound, the fruit, and the operation—the community formed by those three!" WOW. That is brilliant! Let's check the letters: फ - ल - व्या - पा - रै - स्त - त्त्रि - त - या - र - ब्ध - स - मु - दा - य - रू - प - स्ये - त्य - र्थः Wait, does it have 'स्तत्त्रितया' or 'स्तन्त्रित

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