भारतकोश
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पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)

Patanjali Yoga Darshan

महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा

DevanagariHindipublished184 पृष्ठ

( १५९ )

पाद सूत्र पृष्ठ

व्युत्थाननिरोधसंस्कारयोरभिभवप्रादुर्भावौ निरोधक्षण- चित्तान्वयो निरोधपरिणामः ... ३ ९ ८६

[ श ] शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः ... १ ९ ७ शब्दार्थप्रत्ययानामितरेतराध्यासात्संकरस्तत्प्रविभाग- संयमात्सर्वभूतरुतज्ञानम् ... ३ १७ ९६ शान्तोदिताव्यपदेश्यधर्मानुपाती धर्मी ... ३ १४ ९३ शौचसंतोषतपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि नियमाः २ ३२ ६७ शौचात्स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः ... २ ४० ७३ श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम् ... १ २० १६ श्रुतानुमानप्रज्ञाभ्यामन्यविषया विशेषार्थत्वात् ... १ ४९ ३८ श्रोत्राकाशयोः सम्बन्धसंयमाद्दिव्यं श्रोत्रम् ... ३ ४१ १११

[ स ] सति मूले तद्विपाको जात्यायुर्भोगाः ... २ १३ ५० स तु दीर्घकालनैरन्तर्यसत्काराऽऽसेवितो दृढभूमिः १ १४ ११ सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ... २ ३६ ७१ सत्त्वपुरुषयोरत्यन्तासंकीर्णयोः प्रत्ययाविशेषो भोगः परार्थात्स्वार्थसंयमात्पुरुषज्ञानम् ... ३ ३५ १०५ सत्त्वपुरुषयोः शुद्धिसाम्ये कैवल्यम् ... ३ ५५ १२४ सत्त्वपुरुषान्यताख्यातिमात्रस्य सर्वभावाधिष्ठातृत्वं सर्वज्ञातृत्वं च ... ३ ४९ ११९ सत्त्वशुद्धिसौमनस्यैकाग्र्येन्द्रियजयात्मदर्शनयोग्यत्वानि च २ ४१ ७३ सदा ज्ञाताश्चित्तवृत्तयस्तत्प्रभोः पुरुषस्यापरिणामित्वात् ४ १८ १३८ समाधिभावनार्थः क्लेशतनूकरणार्थश्च ... २ २ ४१ समाधिसिद्धिरीश्वरप्रणिधानात् ... २ ४५ ७५ समानजयाज्ज्वलनम् ... ३ ४० ११०

( १६० )

पादसूत्रपृष्ठ
संतोषादनुत्तमसुखलाभः ...४२
संस्कारसाक्षात्करणात्पूर्वजातिज्ञानम् ...१८
सर्वार्थतैकाग्रतयोः क्षयोदयौ चित्तस्य समाधिपरिणामः११
सुखानुशयी रागः ...
सूक्ष्मविषयत्वं चालिङ्गपर्यवसानम् ...४५
सोपक्रमं निरुपक्रमं च कर्म तत्संयमादपरान्तज्ञान- <br> मरिष्टेभ्यो वा ...२२
स्थान्युपनिमन्त्रणे सङ्गस्मयाकरणं पुनरनिष्टप्रसङ्गात्५१
स्थिरसुखमासनम् ...४६
स्थूलस्वरूपसूक्ष्मान्वयार्थवत्त्वसंयमाद्भूतजयः४४
स्मृतिपरिशुद्धौ स्वरूपशून्येवार्थमात्रनिर्भासा निर्वितर्का४३
स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनं वा ...३८
स्वरसवाही विदुषोऽपि तथारूढोऽभिनिवेशः
स्वविषयासंप्रयोगे चित्तस्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः५४
स्वस्वामिशक्त्योः स्वरूपोपलब्धिहेतुः संयोगः२३
स्वाध्यायादिष्टदेवतासंप्रयोगः ...४४

[ ह ]

हानमेषां क्लेशवदुक्तम् ... | ४ | २८ | १४६ हृदये चित्तसंवित् ... | ३ | ३४ | १०५ हेतुफलाश्रयालम्बनैः संगृहीतत्वादेषामभावे तदभावः | ४ | ११ | १३३ हेयं दुःखमनागतम् ... | २ | १६ | ५५


समाप्त

श्रीहरिः

गीताप्रेस, गोरखपुरकी पुस्तक-सूची

<u>श्रीमद्भगवद्गीता</u><u>तत्त्व-चिन्तामणि (बड़ा)</u>
गीता-तत्त्वविवेचनी सजिल्द ४)भाग १ अजिल्द ॥=)
गीता मझोली ॥=) सजिल्द १),, २—III=) सजिल्द १।)
गीता मोटे अक्षरवाली अर्थ-सहित ॥) सजिल्द III=),, ३—॥≡) सजिल्द १-)
गीता केवल भाषा ।),, ६—१) सजिल्द १।=)
गीता छोटी भाषाटीका =)॥ सजिल्द I)॥<u>तत्त्व-चिन्तामणि (गुटका)</u>
गीता मूल विष्णुसहस्रनाम-सहित -)॥भाग १ ।-)
गीता मूल महीन अक्षर )॥,, ५ ।=)
गीताडायरी सन् १९५१ साधारण जिल्द ॥=)ढाई हजार अनमोल बोल (संत-वाणी) ॥=) स० III=)
प्रश्नोपनिषद् ।≡)कवितावली ॥-)
ऐतरेयोपनिषद् ।=)दोहावली ॥)
श्रीमद्भागवत महापुराणसुखी जीवन ॥)
मूल (गुटका) सजिल्द ३)नैवेद्य ॥)
<u>श्रीरामचरितमानस</u>उपनिषदोंके १४ रत्न ।=)
मझोली भाषाटीका सजि० ३॥)लोक-परलोकका सुधार भाग १ ।=)
मझोली मूल सजिल्द २)लोक-परलोकका सुधार भाग २ ।=)
मानस-शंका-समाधान ॥)रामायण प्रथमा परीक्षा ।=)
विनय-पत्रिका १) सजि० १।=)भक्त नरसिंह मेहता ।=)
गीतावली सटीक १) सजि० १।=)प्रेम-दर्शन ।-)
<u>भक्त-चरित-माला</u>
भक्त बालक ।-)
भक्त नारी ।-)
[ २ ]

| | | | |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| भक्त-पञ्चरत्न | ।-) | नवधा भक्ति | =) |
| आदर्श भक्त | ।-) | बाल-शिक्षा | =) |
| भक्त-चन्द्रिका | ।-) | रामायण-शिशु-परीक्षा पाठ्य- | |
| भक्त-सप्तरत्न | ।-) | पुस्तक | =) |
| भक्त-कुसुम | ।-) | **भजन-संग्रह** | |
| प्रेमी भक्त | ।-) | प्रथम भाग | =) |
| प्राचीन भक्त | ॥) | द्वितीय भाग | =) |
| भक्त-सौरभ | ।-) | तृतीय भाग | =) |
| भक्त-सरोज | ।=) | चतुर्थ भाग | =) |
| भक्त-सुमन | ।=) | पञ्चम भाग | =) |
| **आदर्श चरित-माला** | | गीताके पदोंकी वर्णानुक्रमसूची | =) |
| भक्तराज हनुमान् | ।-) | स्त्रीधर्म-प्रश्नोत्तरी | -)॥ |
| सत्यप्रेमी हरिश्चन्द्र | ।-) | नारीधर्म | -)॥ |
| प्रेमी भक्त उद्धव | ≡) | गोपी-प्रेम | -)॥ |
| महात्मा विदुर | =)॥ | मनुस्मृति दूसरा अध्याय | -)॥ |
| भक्तराज ध्रुव | ≡) | ध्यानावस्थामें प्रभुसे वार्तालाप | -)॥ |
| विवेक-चूडामणि | ।-) | श्रीविष्णुसहस्रनाम सटीक | -)॥ |
| परमार्थ-पत्रावली भाग १ | ।) | हनुमानबाहुक | -)॥ |
| ” २ | ।) | श्रीसीताके चरित्रसे आदर्श | |
| ” ३ | ॥) | शिक्षा | -)। |
| कल्याण-कुञ्ज | ।) | मनको वशमें करनेके उपाय | -)। |
| महाभारतके आदर्श पात्र | ।) | ईश्वर | -)। |
| आदर्श भ्रातृ-प्रेम | ≡) | मूल रामायण | -)। |
| मानव-धर्म | ≡) | रामायण-मध्यमा-परीक्षा-पाठ्य- | |
| गीता-निबन्धावली | =)॥ | पुस्तक | -)। |
| साधन-पथ | =)॥ | हरेरामभजन १४ माला | ।-) |
| मनन-माला | =)॥ | हरेरामभजन ६४ माला | १) |
| | | शारीरकमीमांसादर्शन | )॥ |
| | | बलिवैश्वदेवविधि | )॥ |

[ ३ ]

The Philosophy of Love 1-0-0The Divine Name and Its Practice 0-3-0
Gems of Truth (Second Series)The Immanence of God 0-2-0
(Bound) 0-12-0What is God? 0-2-0
The Bhagavadgita 0-4-0Wavelets of Bliss 0-2-0
Bound 0-6-0What is Dharma? 0-0-9
The Divine Message 0-0-9

नयी सूचना

छोटी-छोटी पुस्तकोंके बंद लिफाफोंमें पैकेट बनाये गये हैं। इन पैकेटोंपर पुस्तकोंके अलग-अलग नाम तथा मूल्य छाप दिया गया है। पैकेटोंमें हेर-फेर नहीं किया जाता है। किसी भी पुस्तककी अधिक संख्यामें अलग माँग दी जा सकती है।
पैकेटोंका विवरण इस प्रकार है—

पैकेट नं० १, पुस्तक-संख्या १३, मूल्य ॥।)

१—सामयिक चेतावनी —)९—श्रीमद्भगवद्गीताका तात्त्विक विवेचन —)
२—आनन्दकी लहरें —)१०—भगवत्तत्त्व —)
३—गोविन्द-दामोदर-स्तोत्र —)११—सन्ध्योपासनविधि अर्थ-सहित —)
४—श्रीप्रेमभक्तिप्रकाश —)१२—हरेरामभजन दो माला )॥
५—ब्रह्मचर्य —)१३—पातञ्जलयोगदर्शन मूल )।
६—सप्त महाव्रत —)-----------------------------
७—सच्चा सुख और उसकी प्राप्ति —)                                           ॥।)
८—भगवन्नाम —)

पैकेट नं० २, पुस्तक-सं० ५, मूल्य ।)

१—संत-महिमा )॥४—वैराग्य )॥
२—श्रीरामगीता )॥५—रामायण सुन्दरकाण्ड —)
३—विष्णुसहनाम मूल )॥-----------------------------
                                           ।)

[ ४ ]

पैकेट नं० ३, पुस्तक-संख्या १६, मूल्य ॥)

१—विनय-पत्रिकाके पंद्रह पद (सार्थ) )॥१०—भगवत्प्राप्तिके विविध उपाय )॥
२—सीतारामभजन )॥११—व्यापारसुधारकी आवश्यकता और व्यापारसे मुक्ति )॥
३—भगवान् क्या हैं ? )॥१२—स्त्रियोंके कल्याणके कुछ घरेलू प्रयोग )॥
४—भगवान्‌की दया )॥१३—परलोक और पुनर्जन्म )॥
५—गीतोक्त सांख्ययोग और निष्कामकर्मयोग )॥१४—ज्ञानयोगके अनुसार विविध साधन )॥
६—सेवाके मन्त्र )॥१५—अवतारका सिद्धान्त )॥
७—प्रश्नोत्तरी )॥१६—गीताके श्लोकोंकी वर्णानुक्रम-सूची )॥
८—सन्ध्या विधिसहित )॥
९—सत्यकी शरणसे मुक्ति )॥<u>                                                                                  </u><br>                                                                                   ॥)

पैकेट नं० ४, पुस्तक-सं० १८, मूल्य ।)

१—धर्म क्या है ? )।१०—शोक-नाशके उपाय )।
२—श्रीहरिसंकीर्तन-धुन )।११—ईश्वर साक्षात्कारके लिये नाम-जप सर्वोपरि साधन है )।
३—दिव्य सन्देश )।१२—चेतावनी )।
४—नारद-भक्ति-सूत्र )।१३—त्यागसे भगवत्-प्राप्ति )।
५—महात्मा किसे कहते हैं ? )।१४—श्रीमद्भगवद्गीताका प्रभाव )।
६—ईश्वर दयालु और न्यायकारी है )।१५—लोभमें पाप आधा पैसा
७—प्रेमका सच्चा स्वरूप )।१६—सप्तश्लोकी गीता आधा पैसा
८—हमारा कर्तव्य )।१७-१८—गजल गीता २ प्रति )।
९—कल्याणप्राप्तिकी कई युक्तियाँ )।<u>                                                                                  </u><br>                                                                                   ।)

पता—गीताप्रेस, पो० गीताप्रेस (गोरखपुर)


नोट—कृपया पेशगीसहित आर्डर भेजें ।

६:

महा... प्रतिज्ञा उत्तर-पत्री
(गो-दर्शन)

... कठिन ... व ... इत्यादि ।
... विषय ... इत्यादि । यथा
१ २ ३ पृष्ठाः ५, ७, १२,
४, ५, ६, ७, ८ पृष्ठाः
... ९, १०, ११, १२ पृष्ठाः
... गानं स्व... मन्त्रहीनं कुर्यात् ।

...
...
...
...
...
...
...
...
... भोज


... - घनश्यामदास ..., गीता प्रेस, गोरखपुर ।