पातञ्जल योगदर्शन (भाष्य सहित)
Patanjali Yoga Darshan
महर्षि पतञ्जलि / हरिकृष्णदास गोयन्दका द्वारा
( १५९ )
पाद सूत्र पृष्ठ
व्युत्थाननिरोधसंस्कारयोरभिभवप्रादुर्भावौ निरोधक्षण- चित्तान्वयो निरोधपरिणामः ... ३ ९ ८६
[ श ] शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः ... १ ९ ७ शब्दार्थप्रत्ययानामितरेतराध्यासात्संकरस्तत्प्रविभाग- संयमात्सर्वभूतरुतज्ञानम् ... ३ १७ ९६ शान्तोदिताव्यपदेश्यधर्मानुपाती धर्मी ... ३ १४ ९३ शौचसंतोषतपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि नियमाः २ ३२ ६७ शौचात्स्वाङ्गजुगुप्सा परैरसंसर्गः ... २ ४० ७३ श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम् ... १ २० १६ श्रुतानुमानप्रज्ञाभ्यामन्यविषया विशेषार्थत्वात् ... १ ४९ ३८ श्रोत्राकाशयोः सम्बन्धसंयमाद्दिव्यं श्रोत्रम् ... ३ ४१ १११
[ स ] सति मूले तद्विपाको जात्यायुर्भोगाः ... २ १३ ५० स तु दीर्घकालनैरन्तर्यसत्काराऽऽसेवितो दृढभूमिः १ १४ ११ सत्यप्रतिष्ठायां क्रियाफलाश्रयत्वम् ... २ ३६ ७१ सत्त्वपुरुषयोरत्यन्तासंकीर्णयोः प्रत्ययाविशेषो भोगः परार्थात्स्वार्थसंयमात्पुरुषज्ञानम् ... ३ ३५ १०५ सत्त्वपुरुषयोः शुद्धिसाम्ये कैवल्यम् ... ३ ५५ १२४ सत्त्वपुरुषान्यताख्यातिमात्रस्य सर्वभावाधिष्ठातृत्वं सर्वज्ञातृत्वं च ... ३ ४९ ११९ सत्त्वशुद्धिसौमनस्यैकाग्र्येन्द्रियजयात्मदर्शनयोग्यत्वानि च २ ४१ ७३ सदा ज्ञाताश्चित्तवृत्तयस्तत्प्रभोः पुरुषस्यापरिणामित्वात् ४ १८ १३८ समाधिभावनार्थः क्लेशतनूकरणार्थश्च ... २ २ ४१ समाधिसिद्धिरीश्वरप्रणिधानात् ... २ ४५ ७५ समानजयाज्ज्वलनम् ... ३ ४० ११०
( १६० )
| पाद | सूत्र | पृष्ठ |
|---|---|---|
| संतोषादनुत्तमसुखलाभः ... | २ | ४२ |
| संस्कारसाक्षात्करणात्पूर्वजातिज्ञानम् ... | ३ | १८ |
| सर्वार्थतैकाग्रतयोः क्षयोदयौ चित्तस्य समाधिपरिणामः | ३ | ११ |
| सुखानुशयी रागः ... | २ | ७ |
| सूक्ष्मविषयत्वं चालिङ्गपर्यवसानम् ... | १ | ४५ |
| सोपक्रमं निरुपक्रमं च कर्म तत्संयमादपरान्तज्ञान- <br> मरिष्टेभ्यो वा ... | ३ | २२ |
| स्थान्युपनिमन्त्रणे सङ्गस्मयाकरणं पुनरनिष्टप्रसङ्गात् | ३ | ५१ |
| स्थिरसुखमासनम् ... | २ | ४६ |
| स्थूलस्वरूपसूक्ष्मान्वयार्थवत्त्वसंयमाद्भूतजयः | ३ | ४४ |
| स्मृतिपरिशुद्धौ स्वरूपशून्येवार्थमात्रनिर्भासा निर्वितर्का | १ | ४३ |
| स्वप्ननिद्राज्ञानालम्बनं वा ... | १ | ३८ |
| स्वरसवाही विदुषोऽपि तथारूढोऽभिनिवेशः | २ | ९ |
| स्वविषयासंप्रयोगे चित्तस्वरूपानुकार इवेन्द्रियाणां प्रत्याहारः | २ | ५४ |
| स्वस्वामिशक्त्योः स्वरूपोपलब्धिहेतुः संयोगः | २ | २३ |
| स्वाध्यायादिष्टदेवतासंप्रयोगः ... | २ | ४४ |
[ ह ]
हानमेषां क्लेशवदुक्तम् ... | ४ | २८ | १४६ हृदये चित्तसंवित् ... | ३ | ३४ | १०५ हेतुफलाश्रयालम्बनैः संगृहीतत्वादेषामभावे तदभावः | ४ | ११ | १३३ हेयं दुःखमनागतम् ... | २ | १६ | ५५
समाप्त
श्रीहरिः
गीताप्रेस, गोरखपुरकी पुस्तक-सूची
| <u>श्रीमद्भगवद्गीता</u> | <u>तत्त्व-चिन्तामणि (बड़ा)</u> |
|---|---|
| गीता-तत्त्वविवेचनी सजिल्द ४) | भाग १ अजिल्द ॥=) |
| गीता मझोली ॥=) सजिल्द १) | ,, २—III=) सजिल्द १।) |
| गीता मोटे अक्षरवाली अर्थ-सहित ॥) सजिल्द III=) | ,, ३—॥≡) सजिल्द १-) |
| गीता केवल भाषा ।) | ,, ६—१) सजिल्द १।=) |
| गीता छोटी भाषाटीका =)॥ सजिल्द I)॥ | <u>तत्त्व-चिन्तामणि (गुटका)</u> |
| गीता मूल विष्णुसहस्रनाम-सहित -)॥ | भाग १ ।-) |
| गीता मूल महीन अक्षर )॥ | ,, ५ ।=) |
| गीताडायरी सन् १९५१ साधारण जिल्द ॥=) | ढाई हजार अनमोल बोल (संत-वाणी) ॥=) स० III=) |
| प्रश्नोपनिषद् ।≡) | कवितावली ॥-) |
| ऐतरेयोपनिषद् ।=) | दोहावली ॥) |
| श्रीमद्भागवत महापुराण | सुखी जीवन ॥) |
| मूल (गुटका) सजिल्द ३) | नैवेद्य ॥) |
| <u>श्रीरामचरितमानस</u> | उपनिषदोंके १४ रत्न ।=) |
| मझोली भाषाटीका सजि० ३॥) | लोक-परलोकका सुधार भाग १ ।=) |
| मझोली मूल सजिल्द २) | लोक-परलोकका सुधार भाग २ ।=) |
| मानस-शंका-समाधान ॥) | रामायण प्रथमा परीक्षा ।=) |
| विनय-पत्रिका १) सजि० १।=) | भक्त नरसिंह मेहता ।=) |
| गीतावली सटीक १) सजि० १।=) | प्रेम-दर्शन ।-) |
| <u>भक्त-चरित-माला</u> | |
| भक्त बालक ।-) | |
| भक्त नारी ।-) |
[ २ ]
| | | | |
| :--- | :--- | :--- | :--- |
| भक्त-पञ्चरत्न | ।-) | नवधा भक्ति | =) |
| आदर्श भक्त | ।-) | बाल-शिक्षा | =) |
| भक्त-चन्द्रिका | ।-) | रामायण-शिशु-परीक्षा पाठ्य- | |
| भक्त-सप्तरत्न | ।-) | पुस्तक | =) |
| भक्त-कुसुम | ।-) | **भजन-संग्रह** | |
| प्रेमी भक्त | ।-) | प्रथम भाग | =) |
| प्राचीन भक्त | ॥) | द्वितीय भाग | =) |
| भक्त-सौरभ | ।-) | तृतीय भाग | =) |
| भक्त-सरोज | ।=) | चतुर्थ भाग | =) |
| भक्त-सुमन | ।=) | पञ्चम भाग | =) |
| **आदर्श चरित-माला** | | गीताके पदोंकी वर्णानुक्रमसूची | =) |
| भक्तराज हनुमान् | ।-) | स्त्रीधर्म-प्रश्नोत्तरी | -)॥ |
| सत्यप्रेमी हरिश्चन्द्र | ।-) | नारीधर्म | -)॥ |
| प्रेमी भक्त उद्धव | ≡) | गोपी-प्रेम | -)॥ |
| महात्मा विदुर | =)॥ | मनुस्मृति दूसरा अध्याय | -)॥ |
| भक्तराज ध्रुव | ≡) | ध्यानावस्थामें प्रभुसे वार्तालाप | -)॥ |
| विवेक-चूडामणि | ।-) | श्रीविष्णुसहस्रनाम सटीक | -)॥ |
| परमार्थ-पत्रावली भाग १ | ।) | हनुमानबाहुक | -)॥ |
| ” २ | ।) | श्रीसीताके चरित्रसे आदर्श | |
| ” ३ | ॥) | शिक्षा | -)। |
| कल्याण-कुञ्ज | ।) | मनको वशमें करनेके उपाय | -)। |
| महाभारतके आदर्श पात्र | ।) | ईश्वर | -)। |
| आदर्श भ्रातृ-प्रेम | ≡) | मूल रामायण | -)। |
| मानव-धर्म | ≡) | रामायण-मध्यमा-परीक्षा-पाठ्य- | |
| गीता-निबन्धावली | =)॥ | पुस्तक | -)। |
| साधन-पथ | =)॥ | हरेरामभजन १४ माला | ।-) |
| मनन-माला | =)॥ | हरेरामभजन ६४ माला | १) |
| | | शारीरकमीमांसादर्शन | )॥ |
| | | बलिवैश्वदेवविधि | )॥ |
[ ३ ]
| The Philosophy of Love 1-0-0 | The Divine Name and Its Practice 0-3-0 |
| Gems of Truth (Second Series) | The Immanence of God 0-2-0 |
| (Bound) 0-12-0 | What is God? 0-2-0 |
| The Bhagavadgita 0-4-0 | Wavelets of Bliss 0-2-0 |
| Bound 0-6-0 | What is Dharma? 0-0-9 |
| The Divine Message 0-0-9 |
नयी सूचना
छोटी-छोटी पुस्तकोंके बंद लिफाफोंमें पैकेट बनाये गये हैं। इन पैकेटोंपर पुस्तकोंके अलग-अलग नाम तथा मूल्य छाप दिया गया है। पैकेटोंमें हेर-फेर नहीं किया जाता है। किसी भी पुस्तककी अधिक संख्यामें अलग माँग दी जा सकती है।
पैकेटोंका विवरण इस प्रकार है—
पैकेट नं० १, पुस्तक-संख्या १३, मूल्य ॥।)
| १—सामयिक चेतावनी —) | ९—श्रीमद्भगवद्गीताका तात्त्विक विवेचन —) |
| २—आनन्दकी लहरें —) | १०—भगवत्तत्त्व —) |
| ३—गोविन्द-दामोदर-स्तोत्र —) | ११—सन्ध्योपासनविधि अर्थ-सहित —) |
| ४—श्रीप्रेमभक्तिप्रकाश —) | १२—हरेरामभजन दो माला )॥ |
| ५—ब्रह्मचर्य —) | १३—पातञ्जलयोगदर्शन मूल )। |
| ६—सप्त महाव्रत —) | ----------------------------- |
| ७—सच्चा सुख और उसकी प्राप्ति —) | ॥।) |
| ८—भगवन्नाम —) |
पैकेट नं० २, पुस्तक-सं० ५, मूल्य ।)
| १—संत-महिमा )॥ | ४—वैराग्य )॥ |
| २—श्रीरामगीता )॥ | ५—रामायण सुन्दरकाण्ड —) |
| ३—विष्णुसहनाम मूल )॥ | ----------------------------- |
| ।) |
[ ४ ]
पैकेट नं० ३, पुस्तक-संख्या १६, मूल्य ॥)
| १—विनय-पत्रिकाके पंद्रह पद (सार्थ) )॥ | १०—भगवत्प्राप्तिके विविध उपाय )॥ |
| २—सीतारामभजन )॥ | ११—व्यापारसुधारकी आवश्यकता और व्यापारसे मुक्ति )॥ |
| ३—भगवान् क्या हैं ? )॥ | १२—स्त्रियोंके कल्याणके कुछ घरेलू प्रयोग )॥ |
| ४—भगवान्की दया )॥ | १३—परलोक और पुनर्जन्म )॥ |
| ५—गीतोक्त सांख्ययोग और निष्कामकर्मयोग )॥ | १४—ज्ञानयोगके अनुसार विविध साधन )॥ |
| ६—सेवाके मन्त्र )॥ | १५—अवतारका सिद्धान्त )॥ |
| ७—प्रश्नोत्तरी )॥ | १६—गीताके श्लोकोंकी वर्णानुक्रम-सूची )॥ |
| ८—सन्ध्या विधिसहित )॥ | |
| ९—सत्यकी शरणसे मुक्ति )॥ | <u> </u><br> ॥) |
पैकेट नं० ४, पुस्तक-सं० १८, मूल्य ।)
| १—धर्म क्या है ? )। | १०—शोक-नाशके उपाय )। |
| २—श्रीहरिसंकीर्तन-धुन )। | ११—ईश्वर साक्षात्कारके लिये नाम-जप सर्वोपरि साधन है )। |
| ३—दिव्य सन्देश )। | १२—चेतावनी )। |
| ४—नारद-भक्ति-सूत्र )। | १३—त्यागसे भगवत्-प्राप्ति )। |
| ५—महात्मा किसे कहते हैं ? )। | १४—श्रीमद्भगवद्गीताका प्रभाव )। |
| ६—ईश्वर दयालु और न्यायकारी है )। | १५—लोभमें पाप आधा पैसा |
| ७—प्रेमका सच्चा स्वरूप )। | १६—सप्तश्लोकी गीता आधा पैसा |
| ८—हमारा कर्तव्य )। | १७-१८—गजल गीता २ प्रति )। |
| ९—कल्याणप्राप्तिकी कई युक्तियाँ )। | <u> </u><br> ।) |
पता—गीताप्रेस, पो० गीताप्रेस (गोरखपुर)
नोट—कृपया पेशगीसहित आर्डर भेजें ।
६:
महा... प्रतिज्ञा उत्तर-पत्री
(गो-दर्शन)
... कठिन ... व ... इत्यादि ।
... विषय ... इत्यादि । यथा
१ २ ३ पृष्ठाः ५, ७, १२,
४, ५, ६, ७, ८ पृष्ठाः
... ९, १०, ११, १२ पृष्ठाः
... गानं स्व... मन्त्रहीनं कुर्यात् ।
...
...
...
...
...
...
...
...
... भोज
... - घनश्यामदास ..., गीता प्रेस, गोरखपुर ।