फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०६ फलदीपिका है उनकी जन्मकुण्डली में अवश्य बृहस्पति बलवान् होता है ऐसा हमारा मत है। बैंक भी बृहस्पति के अन्तर्गत आते हैं। शुक्र :—यदि नवांशेश शुक्र हो तो किसी स्त्री के आश्रय द्वारा (चाहे वह अपनी पत्नी हो या अन्य स्त्री या वेश्या या महारानी या फिल्म एक्ट्रैस या अन्य कोई महिला), गाय, भैंस, हाथी, घोड़े, आदि द्वारा, गाने-बजाने के उपायों द्वारा, या वाद्य यन्त्रों से, नाच-गान से चाँदी से, सुगन्धित वस्तुओं से, दूध, दही, घी आदि से अलंकारों से, रेशमी और बढ़िया वस्त्रों से, काव्य द्वारा या किसी राजा के या किसी उच्चाधिकारिणी महिला के मन्त्री के सहायक होने से, धन प्राप्ति होती है। हमारे विचार से सिनेमा, चलचित्र या अन्य जितने भी सौन्दर्य विलास और भोग के साधन हैं वह सब शुक्र के वर्ग में हैं। इस कारण इन उपायों द्वारा भी शुक्र धन दिलाता है। शनि :—यदि नवांशेश शनि हो तो मूल (जो वनस्पति पृथ्वी के अन्दर रहती है) फल, शारीरिक परिश्रम द्वारा, नौकरी द्वारा (स्वयं दूसरे की नौकरी करे या स्वयं अन्य व्यक्तियों को नौकर रखे), दुष्टों द्वारा या नीच जनों के धन से धनी हो। जिस व्यक्ति को नीच आद- मियों से थोड़ा-थोड़ा धन प्राप्त होता हो और इस थोड़े-थोड़े द्रव्य के सग्रह द्वारा वह धनी हो जाये तो उसे नीच जनों से धनी होना कहेंगे। उदाहरण के लिये यदि कोई मजिस्ट्रेट मुलज़िमों से रिश्वत लेकर धनी हुआ हो या कोई सुपरिटेण्डेण्ट जेल कैदियों से रिश्वत लेकर धनी हुआ हो तो इन दोनों को ही नीच जनों के धन से धनी कहेंगे। शनि जब नवांशेश होता है तो कुधान्यों से (गेहूं, चावल आदि उत्तम धान्य समझे जाते हैं और मोटे धान्यों को कुधान्य कहते हैं). कुत्सित (अन्याय, अधर्म, अनीति) अर्थात् निन्दित मार्गों से धन दिलाता है। क़त्ल करने से जो धन प्राप्त हो या रिश्वत से या वेश्या के यहां दलाली करने से यह सब निन्दित मार्ग समझे जाते हैं। शनि परिश्रम द्वारा धन दिलाता है, अनपढ़ आदमी हो तो ज़मीन खोदेगा, बोझा