भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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१३६ फलदीपिका कोई से दो ग्रहों के) परस्पर स्थान परिवर्तन का फ़ल बताया गया है । परन्तु उत्तर कालामृत में छठे, आठवें तथा बारहवें के मालिक तीनों दुः- स्थान* में हों, परस्पर युत (सहित) या ईक्षित (एक दूसरे से देखे जाते) हों और अन्य किसी शुभ स्थान के स्वामियों से सम्बन्ध न करें यह आवश्यक शर्त लगाई गई है । अस्तु, उत्तर कालामृत के इस श्लोक का हवाला तो प्रसंग वश दे दिया गया है । अब प्रस्तुत विषय पर आइये । शुभ स्थानों के स्वामियों के परस्पर स्थान परिवर्तन से जो महायोग कहे गये हैं उनके उदाहरण में कुछ जन्म कुण्डलियाँ नीचे दी जाती हैं । नीचे श्रीमती इन्दिरा गांधी की जन्म कुण्डली दी जा रही है । इनका जन्म प्रयाग में सूर्योदय के ४१ घड़ी ५२ पल २३ विपल बाद १९ नवम्बर १९१७ को हुआ । स्पष्ट लग्न और स्पष्ट ग्रह निम्नलिखित हैं :— लग्न ३-२७°-१३' सूर्य ७-४°-८' चन्द्र ९-५°-३७' मंगल ४-१६°-२३' बुध ७-१३°-१५' बृहस्पति १-१५°-१' वक्री शुक्र ८-२१°-०, शनि ३-२१°-४७' राहु ८-१०°-३३' केतु २-१०°-३३' इनकी जन्म कुण्डली में लग्नेश सप्तम में तथा सप्तमेश में लग्न है, यह एक महायोग हुआ । द्वितीयेश पंचम में, पंचमेश द्वितीय में है। यह दूसरा महायोग हुआ । किन्तु षष्ठेश लाभ में और लाभेश षष्ठ में है यह दैन्य योग है ।

  • ६, ८, १२ स्थान को दुः स्थान कहते हैं ।