भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

पृष्ठ 139, कुल 684 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 139

१३८ फलदीपिका में) वहां के स्टैण्डर्ड समय के अनुसार रात्रि को ९ बजकर ३० मिनिट पर हुआ।


[कुण्डली १]

भावराशि संख्याग्रह
लग्न (प्रथम भाव)
द्वितीय भावके.
तृतीय भाव
चतुर्थ भाव
पञ्चम भावसू. मं. बु. बृ.
षष्ठ भाव१०चं.
सप्तम भाव११शु.
अष्टम भाव१२रा.
नवम भाव
दशम भावश.
एकादश भाव
द्वादश भाव

ग्रह-स्पष्ट: लग्न ४-२३-३३-२६ सूर्य ८-२६-४५-४८ चन्द्रमा ९-२७-२६ मंगल ८-७-७ बुध ८-७-२४ बृहस्पति ८-९-६ शुक्र १०-११-४३ शनि १-४-४० राहु ११-१४-८ केतु ५-१४-८


सप्तमेश राज्य में, राज्येश सप्तम में है यह महायोग है। लग्नेश, चतुर्थेश, पंचमेश, नवमेश एक साथ भी राजयोग कारक है परन्तु यहाँ केवल महायोग के उदाहरण के लिए यह कुण्डली दी गई है। नीचे स्वर्गीय महामहोपाध्याय श्री शिवकुमार शास्त्री जी की जन्म कुण्डली दी जाती है। शुभ विक्रम संवत् १९०४ फाल्गुन कृष्ण एकादशी बुधे श्री सूर्योदयादिष्टम् ४।३०।


[कुण्डली २]

भावराशि संख्याग्रह
लग्न (प्रथम भाव)१२के. बु.
द्वितीय भाव
तृतीय भावमं.
चतुर्थ भावबृ.
पञ्चम भाव
षष्ठ भाव
सप्तम भावरा०
अष्टम भाव
नवम भाव
दशम भावचं.
एकादश भाव१०शु.
द्वादश भाव११सू. श.

लग्नेश चतुर्थ में, चतुर्थेश लग्न में महायोग करता है।