भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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छठा अध्याय : योग १३९ लग्नाधिपाप्तभपतिस्थितराशिनाथः स्वोच्चस्वभेषु यदि कोणचतुष्टयस्थः । योगःस काहल इति प्रथितोऽथतद्वत् लग्नाधिपाप्तभपतिर्यदि पर्वताख्यः ॥ ३५ ॥ वर्द्धिष्णुरार्यः सुमतिः प्रसन्नः क्षेमङ्करः काहलजो नृमान्यः । स्थिरार्थसौख्यः स्थिरकार्यकर्त्ता क्षितीश्वरः पर्वतयोगजातः ॥३६॥ (१) जन्म कुण्डली में देखिये कि लग्नेश किस राशि में बैठा है— उस राशि का स्वामी जिस राशि में है — उस राशि का स्वामी अपनी [कुण्डली: लग्न १; २; ३; ४; ५ मं.; ६; ७ श.; ८; ९; १०; ११ सू.; १२] उच्च राशि या स्वराशि में स्थित होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो तो काहल योग होता है। साथ की कुण्डली में मेष लग्न है। इसका स्वामी मंगल हुआ। मंगल सिंह राशि में बैठा है इस सिंह राशि का स्वामी सूर्य है—सूर्य कुम्भ में बैठा है; और कुंभ का स्वामी शनि तुला में उच्च का होकर लग्न से केन्द्र में बैठा है इस कारण काहल योग हुआ । जो काहल योग में उत्पन्न होता है वह अच्छी बुद्धि वाला, वर्द्धिष्णु (वृद्धि को प्राप्त) श्रेष्ठ, प्रसन्न, दूसरों का कल्याण करने वाला और जनता द्वारा मान्य होगा अर्थात् लोग उसका आदर करेंगे। देखिये श्री आशुतोष मुकर्जी की जन्म कुण्डली । इन बंगकेसरी का जन्म २९ जून सन् १९६४ को हुआ ।