भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

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१४० फलदीपिका इस कुण्डली में लग्नेश शुक्र मेष में है। मेष का मालिक मंगल है। मेष का मालिक (मंगल) अपनी राशि में है। परन्तु केन्द्र या त्रिकोण में नहीं है इसलिये योग नहीं हुआ। देखिये श्री के० के० शाह मंत्री भारत-सरकार की जन्म कुण्डली। इनका जन्म २७-१०-१९०८ को वृश्चिक लग्न में हुआ। लग्न का स्वामी मंगल है। यह लग्नेश मकर में है, मकर का स्वामी शनि है। शनि कुंभ में, कुंभ का स्वामी शनि केन्द्र में है इसलिये काहल योग हुआ (२) इसी प्रकार यह देखिये कि जन्म कुण्डली में लग्नेश जिस राशि में है उस राशि का स्वामी कहां है। यदि लग्नेश जिस राशि में है उस राशि का स्वामी अपनी उच्च राशि या स्वराशि में स्थित होकर केन्द्र या त्रिकोण में हो तो पर्वत योग होता है।