भारतकोश
फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)

Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary

मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished684 पृष्ठ

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१४२ फलदीपिका श्री शाह की जन्म कुण्डली में पर्वत योग भी होता है क्योंकि लग्नेश (मंगल) स्थित राशि (मकर) का स्वामी शनि स्वराशि में केन्द्र में है। साथ में श्री मोरार जी देसाई की कुंडली दी जाती है । इनका जन्म, २९ फरवरी १८९६ को मिथुन लग्न में हुआ। मिथुन लग्न का स्वामी बुध मकर में है । मकर का स्वामी शनि अपनी उच्च राशि में त्रिकोण इस कारण पर्वत योग हुआ । (१.) यदि नवम और दशम भवन के स्वामी दोनों संयुक्त होकर किसी शुभ भाव में एक साथ बैठें तो राजयोग होता है। (२) यदि किसी केन्द्र का स्वामी किसी त्रिकोण के स्वामी के साथ संयुक्त होकर किसी शुभ भाव में बैठे तो शंख योग होता है। ॥३७॥ जो व्यक्ति राजयोग में उत्पन्न होता है वह राजा या राजा* के समान पदवी वाला होता है। जब वह यात्रा करता है तो भेरी, शंख ढोल आदि बाजे साथ में बजते हुये चलते हैं; उसके सिर पर छत्र रहता है। उसके साथ-साथ, हाथी, घोड़े, पालकी आदि बहुत सी सवारी चलती हैं। भाट और चारण उसकी स्तुति या प्रशंसा गाते रहते हैं और बहुत से बड़े-बड़े आदमी नाना रूप के सुन्दर उपहार हाथों में लिये भेंट करने के लिये प्रस्तुत रहते हैं। बहुत सी श्रेष्ठ वनिताओं का भोग और सम्पत्ति प्राप्त होती है। ॥३८॥

  • जिस समय आज से सैकड़ों वर्ष पहले मन्त्रेश्वर महाराज ने फलदीपिका का निर्माण किया उस समय भारतवर्ष में हजारों राजा थे। ऐसे-ऐसे व्यक्ति राजा थे जिनकी आय ३०-४० या ५० हजार