फलदीपिका (मन्त्रेश्वर दैवज्ञ - सम्पूर्ण २८ अध्याय, भाव-विचार, दशा-फल एवं गोचर सटीक)
Phaladeepika of Mantreshwara Daivajna with Commentary
मन्त्रेश्वर दैवज्ञ (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण व्यास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४४ फलदीपिका से तो दाम योग होता है। जो इस योग में उत्पन्न होता है वह राजा के समान दूसरों का उपकार करने वाला और स्वयं त्यागी होता है। (३) यदि ७ ग्रह केवल ५ राशियों में हों तो पाश योग होता है। इस योग में उत्पन्न भोगी, धनी, सुशील और बन्धुयुक्त होता है। (४) यदि सातों ग्रह कुल ४ राशियों में हों तो केदार योग बनता है। इस योग वाले व्यक्ति को खेत, खेती और लक्ष्मी का शुभ योग होता है (५) यदि कुल ग्रह ३ राशियों में हों तो शूल योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति हिंसक प्रवृत्ति का क्रोधी और दरिद्र होता है। (६) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह केवल दो राशियों में हों तो युग योग होता है। इस योग में उत्पन्न होने वाले व्यक्ति पाखण्डी और धनहीन होते हैं। (७) यदि सूर्य आदि सातों ग्रह एक ही राशि में हों तो गोल योग होता है। जो गोल योग में उत्पन्न हो वह आलसी अल्पायु, दरिद्री, पापी, म्लेच्छों की संगति में रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति शिल्पकार्य में भी निपुण नहीं होता। ॥३९-४१॥ (१) यदि चन्द्रमा से छठे, सातवें, आठवें शुभ ग्रह हों तो अधि- योग होता है। सौम्यैरिन्दोद्यू॑ नषड्रन्ध्रसंस्थैस्तद्वल्लग्नात्संस्थितैर्वाधियोगः । नेता मन्त्री भूपतिः स्यात्क्रमेण स्यातः श्रीमान्दीर्घजीवी मनस्वी ॥ अधियोगभवो नरेश्वरः स्थिरसंपद्बहुबन्धुपोषकः । अमुना रिपवः पराजिताश्चिरमायुर्लभते प्रसिद्धताम् ॥४३॥ (२) यदि लग्न से छठे, सातवें, आठवें शुभ ग्रह हों तो भी अधि- योग होता है। यदि यह तीनों पूर्ण बली हों अर्थात् बुध, वृहस्पति, शुक्र तीनों पूर्ण बली हों तो अधियोग में उत्पन्न मनुष्य भूपति होता है यदि तीनों मध्यबली हों तो जातक मन्त्री होता है यदि बुध, वृहस्पति शुक्र हीन बली हों तो मनुष्य नेता होता है किन्तु शुभ प्रभाव तब भी रहता